तो जनाब, अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति का नया मंच व्हाइट हाउस या संसद भवन नहीं बल्कि सोशल मीडिया बन चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने पुराने अंदाज़ में घोषणा की कि वह अगले हफ्ते पीएम मोदी से बिजनेस की बात करेंगे। अब ये अलग बात है कि बिजनेस की जगह बात ज्यादा “बड़े भाई-छोटे भाई” वाली दोस्ती पर केंद्रित दिख रही है। ट्रंप ने ट्विटर नहीं, बल्कि अपने “ट्रुथ सोशल” पर यह घोषणा की, जैसे कोई मोहल्ले का नेता व्हाट्सएप ग्रुप में पोस्ट डालकर चुनाव जीतने का ऐलान करता हो। और पीएम मोदी ने भी झटपट एक्स (पूर्व ट्विटर) पर जवाब देते हुए लिखा– “हां भाई, इंतजार रहेगा।” यह देख कर लगता है कि अब रिश्तों की कूटनीति से ज्यादा “रीट्वीट डिप्लोमेसी” काम आ रही है।
वैसे ट्रंप के अनुसार सब कुछ “ऑल इज़ वेल” है। टैरिफ पर टैरिफ लगाकर भारत को पूरी तरह ग्रिल करने के बाद भी उन्होंने मोदी जी को “बेस्ट फ्रेंड” घोषित कर दिया। 50% टैरिफ झेलता भारत सोच रहा होगा– अगर यही दोस्ती है तो दुश्मनी किसे कहते हैं? लेकिन क्या किया जाए, जब दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं आपस में “बड़ी-बड़ी बातें” करती हैं, तो बाकी देशों को बस तालियां बजानी पड़ती हैं। ट्रंप ने खुशी-खुशी कहा– “मैं अपने बेस्ट फ्रेंड मोदी से जल्द बात करूंगा।” और मोदी जी ने मुस्कान के साथ जवाब दिया– “हां, बिल्कुल, हमारी टीम भी तैयार है।” दोनों ओर से बयानबाजी देखकर लगता है कि यह कोई जी-20 मीटिंग नहीं बल्कि पुरानी कॉलेज फ्रेंडशिप रीयूनियन की तैयारी है।
भारत ने भी अमेरिका के टैरिफ को “अनुचित और विवेकहीन” कहकर अपनी नाराज़गी जताई, लेकिन नाराज़गी इतनी प्यारी थी कि उसमें भी दोस्ती की खुशबू आ रही थी। ट्रंप ने एक तरफ कहा– “मुझे मोदी के काम पसंद नहीं आ रहे,” और दूसरी तरफ बोले– “लेकिन वो शानदार प्रधानमंत्री हैं।” यानी जैसे कोई बॉस अपने कर्मचारी को डांटते हुए कहे– “तुम्हारा काम बेकार है, लेकिन तुम बुरे इंसान नहीं हो।” अब देखना यह है कि यह “बेस्ट फ्रेंड” वाली बातें असल में रिश्ते सुधारती हैं या फिर अगले हफ्ते की कॉल पर सिर्फ “हाउ आर यू, ब्रदर?” कहकर खत्म हो जाती हैं। कूटनीति के नाम पर फिलहाल सबको यही समझ आ रहा है– भारत और अमेरिका के रिश्ते अब गंभीर वार्ता से ज्यादा हल्के-फुल्के मीम्स में फिट बैठते हैं।












