नेपाल के राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़ा मोड़ आ गया है। देश के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने मंगलवार (9 सितंबर) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे से पहले नेपाली आर्मी के चीफ जनरल अशोक राज सिगडेल ने उन्हें सलाह दी थी कि कुर्सी छोड़ने से वर्तमान अस्थिर परिस्थितियों में सुधार होगा। देश में सोशल मीडिया ऐप्स पर बैन और इसके विरोध में हो रहे प्रदर्शन ने स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया था। प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति के निवास के सामने प्रदर्शन कर आगजनी जैसी घटनाओं में भी शामिल हुए, जिससे देश की सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता पर सवाल उठ गए।
प्रधानमंत्री ओली ने अपने इस्तीफे में लिखा कि संविधान के अनुच्छेद 76(2) और अनुच्छेद 77(1)(ए) के तहत उन्होंने यह कदम उठाया है ताकि राजनीतिक समाधान और देश की वर्तमान असाधारण स्थिति को ध्यान में रखते हुए उचित दिशा में कदम उठाया जा सके। केपी शर्मा ओली की यह तीसरी बार प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा है। पहली बार वे 2015 में प्रधानमंत्री बने थे और अक्टूबर 2015 से अगस्त 2016 तक पद पर रहे। दूसरी बार 2018 में वे प्रधानमंत्री बने और फरवरी 2018 से मई 2021 तक पद संभाला। तीसरी बार जुलाई 2024 से अगस्त 2025 तक उन्होंने देश का नेतृत्व किया।
देश के बिगड़े हालात के बीच राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने ओली का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। सुरक्षा कारणों से ओली वर्तमान में नेपाली आर्मी की सुरक्षा में हैं। आर्मी चीफ सिगडेल ने पहले ही सुझाव दे दिया था कि सत्ता छोड़ने के बाद ही देश की स्थिति में सुधार हो सकता है। नेपाल की राजनीति में इस घटनाक्रम के बाद नए प्रधानमंत्री के चयन और राजनीतिक समीकरणों पर देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें टिकी हुई हैं। इस अस्थिर समय में देश की जनता और सरकार दोनों के लिए संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।












