नेपाल की राजधानी काठमांडू में Gen-Z के हिंसक विरोध प्रदर्शन ने हालात को नियंत्रण से बाहर कर दिया है। सोशल मीडिया बैन को लेकर नाराज युवाओं ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश जताया। इस दौरान हुई झड़पों में कम से कम 19 लोगों की मौत और 300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। नेपाल के गृह मंत्री रमेश लेखक ने कैबिनेट बैठक के दौरान अपना इस्तीफा सौंप दिया, जबकि प्रदर्शनकारी युवा प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं। नेपाल में हालात को देखते हुए भारत ने अपने नागरिकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है, जिसमें सुरक्षित रहने और स्थानीय अधिकारियों द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि नेपाल में हो रही घटनाओं पर लगातार नजर रखी जा रही है और युवाओं के प्रदर्शन से उत्पन्न हिंसा को लेकर चिंतित हैं। बयान में कहा गया, “हम नेपाल में हो रहे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और कई युवाओं की मौत से बेहद दुखी हैं। हमारी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं मृतकों के परिवारों के साथ हैं। हम घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं।” मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि नेपाल के कई शहरों में कर्फ्यू लागू कर दिया गया है और भारतीय नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे सावधानी बरतें और स्थानीय अधिकारियों के दिशा-निर्देशों का पालन करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि Gen-Z के इस प्रकार के प्रदर्शन नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता को और गहरा सकते हैं। युवा अपनी मांगों को लेकर अडिग हैं और सरकार पर दबाव बनाने के लिए लगातार सड़कों पर उतर रहे हैं। भारत ने अपने नागरिकों से कहा है कि वे नेपाल में अनावश्यक यात्रा से बचें और सुरक्षा के प्रति सतर्क रहें। नेपाल में उत्पन्न यह तनावपूर्ण स्थिति दोनों देशों के लिए चिंता का विषय बन गई है, और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है।












