7 सितंबर की रात भारत समेत पूरी दुनिया में एक अनोखा खगोलीय नजारा देखने को मिलेगा। इस दिन भाद्रपद पूर्णिमा पर साल का आखिरी और दूसरा पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा, जिसे वैज्ञानिक और ज्योतिषी ‘ब्लड मून’ भी कह रहे हैं। रात 9 बजकर 58 मिनट से शुरू होकर यह ग्रहण 8 सितंबर को 1 बजकर 26 मिनट तक चलेगा। खास बात यह है कि रात 11 बजे से चंद्रमा का लाल और नारंगी रंग में बदलना शुरू होगा और 11 बजकर 42 मिनट पर यह अपने चरम पर पहुंचेगा। दिल्ली, जयपुर, लखनऊ, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, भोपाल और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों के लोग इसे अपनी आंखों से देख पाएंगे। खगोल विज्ञानियों का कहना है कि यह करीब 82 मिनट का अद्भुत अनुभव होगा।
ग्रहण के साथ ही देशभर में सूतक काल भी मान्य होगा, जिसके चलते पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी। कई लोग इसे सिर्फ वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखते हैं और मानते हैं कि यह केवल एक खगोलीय घटना है जिसका धार्मिक कर्मकांडों से कोई लेना-देना नहीं। वहीं दूसरी ओर बुजुर्गों का कहना है कि “ग्रहण के समय शुद्धता बनाए रखना जरूरी है और हमें शास्त्रों में लिखी परंपराओं का पालन करना चाहिए।” लखनऊ की एक गृहिणी ने बताया कि वह इस समय घर के छोटे बच्चों को बाहर नहीं जाने देंगी, जबकि मुंबई के एक कॉलेज छात्र का कहना है कि वह अपने दोस्तों के साथ टेरेस पर जाकर कैमरे में इस ब्लड मून को कैद करेगा। यानी यह घटना न केवल खगोलशास्त्र बल्कि परंपराओं और आस्थाओं से भी जुड़ी है।
इस चंद्र ग्रहण का सबसे बड़ा संदेश यही है कि प्रकृति हमें बार-बार यह याद दिलाती है कि ब्रह्मांड का हर परिवर्तन संतुलन और समय के साथ चलता है। ब्लड मून का खूबसूरत दृश्य हमें सिखाता है कि अंधकार के बाद भी प्रकाश आता है और हर बदलाव में एक नई सीख छिपी होती है। वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो यह खगोलीय घटनाएं हमें ज्ञान और खोज की ओर प्रेरित करती हैं, वहीं आध्यात्मिक दृष्टि से यह आत्मचिंतन और संयम का समय माना जाता है। ऐसे अवसर पर जरूरी है कि हम डर या अंधविश्वास से नहीं, बल्कि समझ और संतुलन से जीवन को देखें।












