झारखंड के टुंडी प्रखंड के तिलैयाटांड़ गांव से इंसानियत को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। यहां 45 वर्षीय सुरेश हांसदा की हत्या उसकी ही पत्नी सुरजी मंझियाइन ने कर दी। आरोप है कि सुरेश आए दिन शराब के नशे में पत्नी से मारपीट करता था और अन्य महिला से संबंध भी रखता था। गांववालों का कहना है कि सुरेश का व्यवहार लंबे समय से हिंसक था और उसकी वजह से परिवार और समाज में तनाव का माहौल बन गया था। जब रिश्तेदारों ने कई दिनों तक सुरेश को नहीं देखा तो शक गहराने लगा। घर से उठ रही तेज दुर्गंध ने रहस्य को और गहरा कर दिया। शुक्रवार की शाम जब ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी, तो सच्चाई सामने आई—सुरेश की हत्या कर उसकी लाश घर के अंदर ही मिट्टी में दबाई गई थी।
इस पूरे मामले पर गांव के कई लोगों ने अपनी राय रखते हुए कहा कि शराबबंदी और घरेलू हिंसा जैसे मुद्दों को गंभीरता से न लेने की वजह से ही ऐसे हादसे घटित होते हैं। एक ग्रामीण ने कहा, “अगर सुरेश अपनी आदतें सुधारता तो शायद उसकी जिंदगी बच सकती थी।” वहीं एक महिला ने कहा, “हर दिन शराब के नशे में गाली-गलौज और मारपीट झेलना किसी औरत के लिए नर्क से कम नहीं।” गांव के युवाओं का मानना है कि यह घटना समाज के लिए एक बड़ी सीख है कि घरेलू हिंसा को छिपाने के बजाय सामने लाना जरूरी है। पुलिस ने आरोपी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है और मजिस्ट्रेट की देखरेख में शव को बरामद किया गया। फिलहाल मामले की गहन जांच चल रही है।
यह घटना समाज के लिए कई सवाल खड़े करती है। क्या घरेलू हिंसा को सहते-सहते कभी हालात इतने खतरनाक मोड़ पर पहुंच जाते हैं कि एक पत्नी को इतना बड़ा कदम उठाना पड़ता है? विशेषज्ञों का कहना है कि हिंसा का जवाब हिंसा से नहीं दिया जा सकता। परिवार और समाज को चाहिए कि ऐसे मामलों में समय रहते हस्तक्षेप करें, ताकि कोई भी महिला या पुरुष खुद को अकेला और मजबूर महसूस न करे। इस घटना से यह साफ होता है कि शराब की लत और घरेलू विवाद सिर्फ दो लोगों की जिंदगी नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करते हैं। अब समय है कि हम सब मिलकर यह संदेश फैलाएं—हिंसा छोड़िए, संवाद अपनाइए।












