रांची के ओरमांझी स्थित भगवान बिरसा मुंडा जैविक उद्यान में पहली बार लायी गयी जिराफ की जोड़ी में से मादा जिराफ मिष्टी की मौत ने पूरे राज्य को स्तब्ध कर दिया है। महज एक माह पहले 8 अगस्त को पश्चिम बंगाल के अलीपुर चिड़ियाघर से लायी गयी यह 6 वर्षीय जिराफ अपनी सुंदरता और चंचलता से उद्यान की रौनक बन चुकी थी। लेकिन बुधवार की देर रात अचानक बाड़े में गिरने से उसकी मौत हो गई। जिस उम्मीद के साथ झारखंड के लोग जिराफ को देखने पहुंचे थे, वह महज कुछ ही दिनों में टूट गई।
गुरुवार को रांची पशु चिकित्सा महाविद्यालय के पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. एम.के. गुप्ता के नेतृत्व में विशेषज्ञ दल ने पोस्टमार्टम किया। जिराफ के आंतरिक अंगों के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं ताकि मौत की असली वजह का पता लगाया जा सके। लेकिन इस बीच उद्यान प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। घटना के बाद उद्यान निदेशक जब्बर सिंह और वन क्षेत्र पदाधिकारी रामबाबू कुमार से संपर्क करने की कोशिश की गई, मगर उनके मोबाइल बंद पाए गए। इससे लोगों में और भी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
यह पहला मौका था जब झारखंड के किसी चिड़ियाघर में जिराफ लाया गया था। मिष्टी की मौत ने न सिर्फ चिड़ियाघर की रौनक बुझा दी, बल्कि वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था की गंभीर खामियों को भी उजागर कर दिया। स्थानीय लोगों और वन्यप्रेमियों का कहना है कि अगर उचित देखभाल और सतर्कता बरती जाती तो शायद इस दुर्लभ जीव की जान बचाई जा सकती थी। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह बताएगी कि मिष्टी की मौत लापरवाही का नतीजा थी या प्राकृतिक कारणों का।












