गिरिडीह जिले के बिरनी प्रखंड क्षेत्र में इन दिनों बिजली विभाग की बड़ी लापरवाही और मनमानी का मामला सामने आ रहा है। नियम के अनुसार, नए विद्युतीकरण वाले इलाकों में उपभोक्ताओं को घरेलू बिजली मीटर बिल्कुल मुफ्त लगना चाहिए, लेकिन हकीकत इसके उलट है। कई पंचायतों में स्थानीय मिस्त्रियों और कुछ कर्मियों द्वारा उपभोक्ताओं से मीटर लगाने के लिए तीन हजार से पांच हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं। इस अवैध वसूली ने ग्रामीणों को बेहद परेशान कर दिया है और विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बिजली विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार जहां नए सिरे से विद्युतीकरण हुआ है, वहां उपभोक्ताओं को मुफ्त में बिजली मीटर मिलना चाहिए। इसके बावजूद उपभोक्ताओं से जबरन पैसे लिए जा रहे हैं। कहीं 3000 तो कहीं 5000 रुपये तक की मांग की जा रही है। इस मामले पर जब बिरनी बिजली एसडीओ से बात की गई तो उन्होंने साफ कहा कि घरेलू बिजली मीटर लगाने के लिए उपभोक्ताओं से किसी भी तरह का पैसा नहीं लिया जाना है। यदि कोई मिस्त्री या कर्मी ऐसा करता है तो यह पूरी तरह अवैध है और शिकायत मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, प्रोजेक्ट से जुड़े स्थानीय ठेकेदार ने भी स्वीकार किया कि मिस्त्री अपना मेहनताना 100 से 500 रुपये तक ले सकता है, लेकिन 1000 से 5000 रुपये की वसूली बिल्कुल गलत है। उन्होंने कहा कि मिस्त्रियों को विभाग की ओर से पहले ही भुगतान किया जाता है, इसलिए उपभोक्ताओं से अतिरिक्त वसूली का कोई औचित्य नहीं है। इस बयान के बाद साफ हो गया कि उपभोक्ताओं से मोटी रकम वसूलना पूरी तरह गैरकानूनी है।
इस मामले ने ग्रामीणों और उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। उनका कहना है कि नियमों की सही जानकारी न होने की वजह से वे मजबूरी में पैसे दे रहे हैं। लोगों का सवाल है कि जब विभाग पहले से ही भुगतान करता है तो फिर उपभोक्ताओं से जबरन पैसा क्यों लिया जा रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस पर जल्द रोक नहीं लगाई गई और जिम्मेदारी तय नहीं हुई तो हजारों लोग ठगी का शिकार हो जाएंगे। फिलहाल, उन्होंने विभागीय अधिकारियों से इस मामले की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।












