झारखंड से लेकर दिल्ली तक राजनीति की हलचल के बीच कॉरपोरेट जगत से बड़ी खबर आई है। अडानी ग्रुप ने अपने वित्तीय प्रदर्शन में नया इतिहास रच दिया है। कंपनी का पोर्टफोलियो EBITDA पहली बार 90,572 करोड़ रुपये के पार पहुँच गया है, जो पिछले साल की तुलना में 10 प्रतिशत की मजबूती दिखाता है। कंपनी ने गुरुवार, 28 अगस्त को इस उपलब्धि की जानकारी दी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सफलता अडानी ग्रुप के मजबूत कोर इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस – यूटिलिटी और ट्रांसपोर्ट – की वजह से संभव हो पाई है।
कंपनी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026 की पहली तिमाही में उसके EBITDA का 87 प्रतिशत हिस्सा कोर इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस से आया। इसमें एयरपोर्ट, सोलर और विंड एनर्जी मैन्युफैक्चरिंग से लेकर सड़कों और अन्य इनक्यूबेटेड इंफ्रा एसेट्स शामिल हैं। इन एसेट्स ने पहली बार 10,000 करोड़ के EBITDA को पार किया है। इस शानदार प्रदर्शन ने न केवल निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है बल्कि कंपनी की क्रेडिट प्रोफाइल को भी मजबूती दी है। अडानी ग्रुप की बैलेंस शीट वैश्विक स्तर पर भी मजबूत मानी जा रही है, क्योंकि कंपनी का नेट डेब्ट टू EBITDA महज 2.6 गुना है। इसके अलावा, 53,843 करोड़ रुपये की कैश लिक्विडिटी अगले 21 महीनों तक डेब्ट सर्विसिंग के लिए पर्याप्त है।
वहीं, कंपनी की क्रेडिट प्रोफाइल में भी बड़ा सुधार दर्ज किया गया है। जून में 87 प्रतिशत रन-रेट EBITDA उन एसेट्स से आया है जिनकी डोमेस्टिक रेटिंग ‘AA-‘ और उससे ऊपर है। इतना ही नहीं, अडानी ग्रुप का ऑपरेशन से कैश फ्लो भी 66,527 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। कंपनी का कुल एसेट बेस 6.1 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें सिर्फ एक साल में 1.26 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। अडानी एंटरप्राइजेज के इनक्यूबेटेड बिजनेस तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जिनमें 8 में से 7 प्रोजेक्ट्स लगभग 70 प्रतिशत पूरे हो चुके हैं। वहीं, अडानी ग्रीन एनर्जी की क्षमता 45 प्रतिशत बढ़कर 15,816 मेगावाट हो चुकी है। इस तेज रफ्तार ग्रोथ ने साबित कर दिया है कि अडानी ग्रुप भारतीय ही नहीं बल्कि वैश्विक इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में अपनी पकड़ लगातार मजबूत कर रहा है।












