भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों पर बड़ा झटका लगा है। अमेरिका ने बुधवार से भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लागू कर दिया है। जुलाई 2025 में पहले ही 25% टैरिफ लगाया गया था और अब दूसरी बार लागू होने से कुल मिलाकर यह बोझ 50% तक पहुंच गया है। इसका सीधा असर भारत के परिधान, टेक्सटाइल, रत्न-आभूषण, झींगा, कालीन और फर्नीचर जैसे श्रम आधारित उद्योगों पर पड़ेगा। ट्रेड थिंक टैंक GTRI के मुताबिक, इस कदम के कारण 2025-26 में भारत का अमेरिका को निर्यात करीब 43% तक घट सकता है, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था और लाखों रोजगार प्रभावित होंगे।
अमेरिकी प्रशासन ने इस निर्णय का कारण भारत द्वारा रूस से लगातार कच्चे तेल की खरीद को बताया है। पहले जुलाई 2025 में अमेरिका ने 25% टैरिफ लगाया था और अब 27 अगस्त से एक और 25% शुल्क लागू कर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से भारत के निर्यातकों पर गहरा असर पड़ेगा। परिधान क्षेत्र में रेडीमेड कपड़ों पर टैरिफ अब 63.9% तक पहुंच गया है, वहीं फर्नीचर और मैट्रेस पर 52.3% और स्टील, एल्युमिनियम व कॉपर पर 51.7% शुल्क लगाया जा रहा है। खास बात यह है कि फर्नीचर और मेटल सेक्टर में मिलाकर लगभग एक करोड़ लोग काम करते हैं, जिनकी आजीविका पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।
इतना ही नहीं, झींगा निर्यात पर पहली बार 50% टैरिफ लगाया गया है, जबकि मशीनरी और मैकेनिकल एप्लायंस पर शुल्क बढ़कर 51.3% हो गया है। वहीं वाहन और स्पेयर पार्ट्स पर अब 26% ड्यूटी लगेगी। भारत सरकार के सामने चुनौती यह है कि वह इस नए टैरिफ का समाधान कैसे निकाले ताकि लाखों लोगों के रोजगार सुरक्षित रह सकें और अमेरिका को होने वाले निर्यात में भारी गिरावट को रोका जा सके। अब सबकी निगाहें केंद्र सरकार की रणनीति पर टिकी हैं कि वह अमेरिका से बातचीत कर इस संकट का समाधान कैसे निकालती है।












