भारत और रूस के बीच ऊर्जा क्षेत्र को लेकर एक अहम समझौता हुआ है। रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव ने साफ किया कि रूस से भारत को तेल और ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति लगातार जारी रहेगी। खास बात यह है कि रूस ने एलएनजी (Liquified Natural Gas) निर्यात की संभावनाओं को भी सकारात्मक बताया है। ये समझौता उस समय हुआ है जब अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 25 फीसदी टैरिफ थोप दिया है। ऐसे में भारत-रूस की इस साझेदारी ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बड़ा संदेश दिया है।
इस बैठक में भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर मौजूद रहे, जिन्होंने रूस के साथ सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। मंटुरोव ने कहा कि हम शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी भारत के साथ सहयोग को आगे बढ़ाना चाहते हैं। कुडनकुलम परमाणु संयंत्र की सफल साझेदारी को आधार बनाकर दोनों देशों ने भविष्य में और परियोजनाएं बढ़ाने पर सहमति जताई। साथ ही यह भी तय किया गया कि अब भारत-रूस के बीच 90 फीसदी से अधिक भुगतान राष्ट्रीय मुद्राओं में ही किया जाएगा, जिससे डॉलर पर निर्भरता घटेगी।
बैठक के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और रूस ने व्यापार, ऊर्जा, कृषि, शिक्षा, कौशल विकास और संस्कृति सहित कई अहम क्षेत्रों पर गहन चर्चा की है। उन्होंने भरोसा जताया कि यह सहयोग आने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन में और मजबूत रूप से सामने आएगा। जयशंकर और मंटुरोव ने बैठक के अंत में समझौते पर हस्ताक्षर भी किए, जिसका विस्तृत विवरण दोनों देशों की सरकारें जल्द जारी करेंगी। साफ है कि भारत-रूस की यह डील वैश्विक दबावों के बावजूद दोनों देशों की अटूट साझेदारी का मजबूत उदाहरण है।












