नोएडा के एक डे-केयर सेंटर में 15 महीने की मासूम बच्ची के साथ हुई हैवानियत ने पूरे देश को हिला दिया है। सीसीटीवी फुटेज में दिखा कि एक मेड बच्ची को थप्पड़ मार रही है, जमीन पर पटक रही है, दांतों से काट रही है और पेंसिल से उसके मुंह में चोट पहुंचा रही है। यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि हमारे समाज की नैतिक गिरावट का आईना है। मनोविज्ञान विशेषज्ञ डॉ. मनोश्री गुप्ता के अनुसार, ऐसी हिंसक प्रवृत्ति अक्सर ‘डिस्प्लेसमेंट’ नामक मानसिक प्रक्रिया का नतीजा होती है, जहां बचपन में सहा गया दर्द और हिंसा बाद में किसी कमजोर पर उतारा जाता है। यह न केवल कानूनन अपराध है बल्कि मानवता के लिए कलंक है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के शुरुआती तीन साल उनके मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए बेहद अहम होते हैं। इस दौरान मिला प्यार, सुरक्षा और देखभाल उनके पूरे जीवन को प्रभावित करती है। माता-पिता को चाहिए कि वे डे-केयर से लौटने पर बच्चों के साथ समय बिताएं और उनके व्यवहार में किसी भी बदलाव को गंभीरता से लें—जैसे अचानक चुप हो जाना, डरना, खेलने में कमी, डे-केयर जाने से इनकार या खाने-पीने की आदतों में बदलाव। ऐसे संकेत किसी गहरी समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं।
इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार को डे-केयर सेंटरों के लिए सख्त नियम बनाने की जरूरत है—अनिवार्य लाइसेंसिंग, प्रशिक्षित और प्रमाणित स्टाफ, सीसीटीवी निगरानी, और उल्लंघन पर भारी जुर्माना व लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई। वहीं, अभिभावकों को चाहिए कि वे केवल भरोसेमंद और प्रतिष्ठित डे-केयर का चयन करें, समय-समय पर निरीक्षण करें और बच्चों से रोज संवाद रखें। यह घटना एक चेतावनी है कि बच्चों की सुरक्षा में लापरवाही के नतीजे बेहद खतरनाक हो सकते हैं, और जागरूक माता-पिता के साथ सख्त सरकारी निगरानी ही इसका स्थायी समाधान है।












