राजस्थान हाई कोर्ट ने राज्यभर में सड़कों और राजमार्गों पर बढ़ते आवारा पशुओं, खासकर कुत्तों की समस्या पर कड़ा रुख अपनाते हुए नगर निकायों को तत्काल विशेष अभियान चलाने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि इस अभियान के दौरान पशुओं को न्यूनतम शारीरिक क्षति पहुंचे और उन्हें सुरक्षित आश्रयों में स्थानांतरित किया जाए। यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद आया है, जिसमें दिल्ली-NCR से सभी आवारा कुत्तों को स्थायी रूप से आश्रयों में भेजने का आदेश दिया गया था। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 8 सितंबर तय करते हुए विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें आश्रयों की स्थिति, कर्मचारियों की उपलब्धता और चिकित्सकीय सुविधाओं की जानकारी शामिल होगी।
जोधपुर पीठ के न्यायमूर्ति कुलदीप माथुर और न्यायमूर्ति रवि चिरानिया की खंडपीठ ने साफ चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति या समूह इस अभियान में बाधा डालेगा, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें प्राथमिकी दर्ज करना भी शामिल है। कोर्ट ने विशेष रूप से जोधपुर नगर निगम को एम्स और जिला अदालत परिसर से तुरंत आवारा पशुओं को हटाने का आदेश दिया, क्योंकि ये अत्यधिक भीड़भाड़ वाले क्षेत्र हैं। इसके साथ ही भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और राज्य राजमार्ग प्राधिकरण को हाईवे पर नियमित गश्त करने का निर्देश दिया गया, ताकि यातायात सुचारू बना रहे।
पीठ ने यह भी कहा कि नगर निकाय अपने हेल्पलाइन नंबर और ईमेल आईडी सार्वजनिक करें, ताकि लोग शिकायत दर्ज करा सकें। साथ ही कोर्ट ने नागरिकों से अपील की कि वे करुणा या धार्मिक कारणों से अगर आवारा पशुओं को खाना खिलाना चाहते हैं, तो यह कार्य केवल नगर पालिकाओं या निजी संस्थाओं द्वारा संचालित निर्दिष्ट आश्रयों, तालाबों या गौशालाओं में ही करें। हाई कोर्ट का यह रुख न केवल सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में है, बल्कि पशु कल्याण के लिए भी एक अहम कदम माना जा रहा है।












