देश की शीर्ष आईटी कंपनियों के लिए यह साल अब तक का सबसे निराशाजनक साबित हो रहा है। बीएसई पर लिस्टेड पांच बड़ी आईटी दिग्गज—टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक्नोलॉजीज—के शेयर पिछले सात महीनों में करीब 25% तक गिर चुके हैं। मार्केट कैप दिसंबर 2023 के 32.67 ट्रिलियन रुपये से घटकर अब सिर्फ 24.86 ट्रिलियन रुपये रह गया है। यह गिरावट बीते पांच वर्षों का सबसे खराब प्रदर्शन है, जिसमें सबसे ज्यादा नुकसान टीसीएस को झेलना पड़ा है, जिसका मार्केट कैप करीब 26% घटा है। विशेषज्ञों का कहना है कि गिरती कमाई और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बढ़ती चुनौती ने निवेशकों का भरोसा हिला दिया है।
पांचों प्रमुख कंपनियों के पीई (प्राइस-टू-अर्निंग) रेशियो में भी भारी गिरावट आई है। दिसंबर 2023 में जहां ट्रेलिंग पीई 25.5 गुना था, वह अब घटकर 22.3 गुना रह गया है, जबकि दिसंबर 2021 में यह रिकॉर्ड 36 गुना तक पहुंचा था। एचसीएल टेक्नोलॉजीज में 23.1% गिरावट, इंफोसिस में 24.3%, विप्रो में 20.7% और टेक महिंद्रा में 13.2% की कमी आई है। गिरावट के पीछे कमजोर तिमाही नतीजे, अमेरिकी ट्रेड टैरिफ नीतियों का दबाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और पारंपरिक आईटी सेवाओं की मांग में गिरावट जैसे कारण सामने आए हैं।
सबसे बड़ी चिंता का विषय है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बढ़ता प्रभाव, जिसने पारंपरिक आईटी सेवा मॉडल को चुनौती दी है। इसके साथ ही, टीसीएस द्वारा बड़े पैमाने पर छंटनी की घोषणा ने भी निवेशकों की भावनाओं पर नकारात्मक असर डाला है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अगर कंपनियां तेजी से नई तकनीकों और बदलते बिजनेस मॉडल को अपनाने में विफल रहीं, तो आईटी सेक्टर की यह मंदी लंबे समय तक बनी रह सकती है। आने वाले तिमाहियों में निवेशकों की नजर कंपनियों के नतीजों और टेक्नोलॉजी एडॉप्शन पर टिकी रहेगी।












