अंडाशय का हाई-ग्रेड सीरियस कार्सिनोमा (HGSC) महिलाओं में सबसे घातक कैंसर में से एक माना जाता है, जो अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के धीरे-धीरे बढ़ता है और जब तक इसका पता चलता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। लेकिन अब कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इस जानलेवा बीमारी की जड़ खोज निकाली है। रिसर्च में खुलासा हुआ है कि यह कैंसर असल में अंडाशय से नहीं, बल्कि फैलोपियन ट्यूब की एक खास किस्म की कोशिका — प्री-सिलिएटेड ट्यूबल एपिथीलियल सेल्स — से शुरू होता है। ये कोशिकाएं स्टेम सेल और पूरी तरह विकसित सिलिएटेड सेल के बीच के बदलाव वाले चरण में होती हैं, और यही कैंसर की असली शुरुआत करती हैं।
वैज्ञानिकों ने जीन एडिटिंग तकनीक का उपयोग करके चूहों पर प्रयोग किया और पाया कि जब कैंसर रोकने वाले दो प्रमुख जीन — TP53 और RB1 — इन प्री-सिलिएटेड सेल्स में बंद किए गए, तो कैंसर तेजी से विकसित हुआ। वहीं, इन्हीं जीन को स्टेम सेल्स में बंद करने पर कैंसर नहीं बना, बल्कि सेल्स मर गए। रिसर्च में यह भी पाया गया कि Krt5 नामक जीन इन कोशिकाओं में काफी सक्रिय रहता है, और जब इस जीन वाली कोशिकाओं में TP53 और RB1 को बंद किया गया, तो चूहों में जल्दी ही हाई-ग्रेड अंडाशय कैंसर हो गया।
इस खोज से भविष्य में ओवेरियन कैंसर के खिलाफ बड़ी जीत मिल सकती है। इससे प्री-सिलिएटेड सेल्स को पहचानकर शुरुआती चरण में कैंसर का पता लगाया जा सकेगा, सिलियोगेनेसिस प्रक्रिया को टारगेट कर नया इलाज विकसित किया जा सकेगा और Krt5 जैसे जीन को मार्कर बनाकर बेहतर टेस्ट तैयार किए जा सकेंगे। हालांकि यह स्टडी अभी चूहों पर हुई है, लेकिन इंसानों की फैलोपियन ट्यूब की संरचना काफी समान है। अगर आने वाले समय में यह खोज इंसानों पर भी साबित हो जाती है, तो लाखों महिलाओं की जिंदगी बचाने की दिशा में यह ऐतिहासिक कदम साबित होगा।












