उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में मंगलवार को बादल फटने की दर्दनाक घटना ने तबाही मचा दी। खीर गंगा नदी में आई विनाशकारी बाढ़ में अब तक 4 लोगों की जान जा चुकी है और 138 से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इस आपदा से पूरा क्षेत्र सदमे और भय के साए में है। जहां एक ओर लगातार बारिश और भूस्खलन से संपर्क मार्ग टूट चुके हैं, वहीं दूसरी ओर राहत और बचाव कार्यों में जुटी टीमें दिन-रात प्रयास कर रही हैं। सीएमओ बीएस रावत के मुताबिक, धराली में डॉक्टरों की टीम तैनात है, 25 एंबुलेंस रास्ते में हैं, लेकिन कई जगहों पर रास्ते बंद होने से पहुँच में बाधा आ रही है।
आपदा के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपदा नियंत्रण कक्ष से सेना और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि रेस्क्यू और मेडिकल कैंप्स की स्थापना तेज़ी से हो, पीड़ितों के लिए भोजन, दवा, और जरूरी सामग्री समय पर पहुंचे। भारतीय वायुसेना के चिनूक और एमआई-17 हेलीकॉप्टर को भी स्टैंडबाय में रखा गया है। गंगोत्री नेशनल हाईवे, मनेरी, पापड़गाड़ और अन्य कई स्थानों पर रास्ते बंद हो चुके हैं, जिन्हें जेसीबी की मदद से खोला जा रहा है। राज्य सरकार का दावा है कि हर संभव मदद दी जा रही है, लेकिन प्रभावितों की पीड़ा और डर साफ झलकता है।
इस विनाश के दृश्य ने राजनीतिक हलचल भी तेज कर दी है। शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि विकास प्रकृति की कीमत पर नहीं हो सकता। उन्होंने सरकार से पीड़ितों को उचित मुआवज़ा और पुनर्वास की मांग की। पर्यावरणीय चेतावनियों की अनदेखी और अंधाधुंध निर्माण नीति पर भी सवाल उठे हैं। ये तबाही एक चेतावनी है—कि अगर अब भी हम नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियां इसकी भारी कीमत चुकाएंगी।












