लीकी हार्ट वॉल्व – एक ऐसी दिल की बीमारी जो न चिल्लाती है, न शोर मचाती है, लेकिन अंदर ही अंदर दिल को कमज़ोर बनाती जाती है। मेडिकल भाषा में इसे हार्ट वॉल्व रिगर्जिटेशन कहा जाता है। यह तब होता है जब दिल के वॉल्व ठीक से बंद नहीं हो पाते, जिससे खून पीछे की ओर लीक होकर वापस दिल में बहने लगता है। शुरुआत में इसके लक्षण इतने मामूली होते हैं कि आम लोग थकान या उम्र की वजह समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। लेकिन डॉक्टर्स का कहना है कि अगर यह स्थिति बिगड़ जाए, तो यह हार्ट फेलियर तक पहुंचा सकती है।
हार्ट एक्सपर्ट डॉ. सईद अफरीदी बताते हैं कि यह एक अंडर-डायग्नोज्ड और अंडर-ट्रीटेड बीमारी है, जिसकी वजह से इसके खतरे कई गुना बढ़ जाते हैं। चेस्ट में दबाव महसूस होना, बार-बार खांसी आना, थकान, अनियमित दिल की धड़कन, सीढ़ी चढ़ते वक्त सांस फूलना और पैरों में सूजन – ये सब इसके संभावित संकेत हो सकते हैं। दिल का एक छोटा सा लीकेज भी समय के साथ बहुत बड़ा खतरा बन सकता है। ऐसे में जरूरी है कि हम शरीर के छोटे-छोटे बदलावों को नज़रअंदाज़ न करें और सही वक्त पर जांच करवाएं।
इस बीमारी का इलाज संभव है, लेकिन पहचान वक्त पर होनी चाहिए। इकोकार्डियोग्राफी जैसे टेस्ट से इसका डायग्नोसिस किया जा सकता है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार मेडिकेशन या सर्जरी के विकल्प भी मौजूद हैं।












