पूर्व राष्ट्रपति और दोबारा सत्ता में लौटे डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की आर्थिक नीतियों में भूचाल ला दिया है। 3 अगस्त को ट्रंप ने रेसिप्रोकल टैरिफ यानी पारस्परिक शुल्क का बचाव करते हुए कहा कि अमेरिका अब अपनी कर्ज़दारी चुकाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने दो टूक कहा—”हम कर्ज चुकाने जा रहे हैं। जो पैसा अब अमेरिका में आ रहा है, वो पहले कभी नहीं आया। हमें ये कदम बहुत पहले उठाना चाहिए था।” ट्रंप ने चीन के साथ अपने पहले कार्यकाल की नीति का हवाला देते हुए कहा कि कोविड-19 ने बाकी योजनाओं पर रोक लगा दी थी, लेकिन अब अमेरिका पूरी तरह से तैयार है।
व्हाइट हाउस में दोबारा वापसी करते ही ट्रंप ने अमेरिका की ग्लोबल इकोनॉमिक पॉलिसी की परिभाषा ही बदल डाली। उन्होंने उन देशों पर सीधा आर्थिक वार किया जो अमेरिकी उत्पादों पर एकतरफा टैक्स लगाते थे। 2 अप्रैल को ट्रंप ने व्यापार घाटे वाले 69 देशों से आयात पर 50% तक रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का ऐलान किया। इसके साथ ही सभी देशों पर 10% का बेसलाइन टैरिफ भी तय किया गया। जब इसका विरोध शुरू हुआ तो उन्होंने 90 दिनों की मोहलत दी, मगर अधिकांश देश ट्रंप की शर्तों के आगे झुक गए।
भारत को भी इस टैरिफ चक्रव्यूह का सामना करना पड़ा है। ट्रंप ने भारत पर 25% टैरिफ लगाया जबकि ब्राजील पर 50%, कनाडा पर 35%, स्विट्जरलैंड पर 39%, ताइवान पर 20%, और पाकिस्तान पर 29% टैरिफ लगाया गया जिसे बाद में 19% कर दिया गया। ट्रंप ने साफ़ कर दिया कि ये कदम दबाव नहीं, बल्कि निष्पक्षता के लिए हैं।












