झारखंड के जननायक, आदिवासी समाज के स्तंभ और झामुमो के संस्थापक संरक्षक शिबू सोरेन का सोमवार सुबह 8:56 बजे दिल्ली में निधन हो गया। वे लंबे समय से किडनी की बीमारी से पीड़ित थे। 79 वर्षीय पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद के निधन से झारखंड में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है। संसद में उन्हें श्रद्धांजलि देने के बाद राज्यसभा की कार्यवाही भी स्थगित कर दी गई। ‘दिशोम गुरु’ के नाम से प्रसिद्ध शिबू सोरेन झारखंड आंदोलन के सबसे सशक्त प्रतीक रहे, जिन्होंने सदियों से वंचित आदिवासी समाज के हक के लिए संघर्ष की मिसाल कायम की।
उनके निधन पर झारखंड सहित पूरे देश में शोक की लहर है। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि “शिबू सोरेन हमेशा गरीबों, आदिवासियों और शोषित वर्ग की आवाज बने रहे। उनका जाना हम सबके लिए अपूरणीय क्षति है।” वहीं, बीजेपी नेता राज सिन्हा ने कहा, “उनके जाने से झारखंड एक अभिभावक को खो चुका है। वे एक युग के अंत का प्रतीक हैं, जो दलितों, आदिवासियों और वंचितों के लिए आशा की किरण थे।”
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी शोक व्यक्त करते हुए कल्पना सोरेन को संवेदना संदेश भेजा और कहा कि “यह सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे झारखंड की क्षति है। हमारी प्रार्थनाएं इस कठिन समय में उनके साथ हैं।” झारखंड की राजनीति में शिबू सोरेन की जगह कोई नहीं भर सकता, और उनका जीवन आज के नेताओं के लिए संघर्ष, सेवा और प्रतिबद्धता की मिसाल बना रहेगा।












