कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई है, जिसमें उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था को “डेड इकोनॉमी” करार देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के शब्दों से सहमति जताई थी। अब इस पर पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ किया कि राहुल गांधी के इस बयान पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा, क्योंकि “ऐसा कहने के उनके अपने कारण हो सकते हैं।” हालांकि, थरूर ने यह जरूर जोड़ा कि उनकी खुद की चिंता भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को लेकर है, जिसे किसी भी स्थिति में खतरे में नहीं डाला जा सकता।
राहुल गांधी ने हाल ही में ट्रम्प के उस बयान का समर्थन किया था जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि भारतीय अर्थव्यवस्था “मर चुकी” है। राहुल ने कहा था, “सिर्फ प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को छोड़कर, पूरी दुनिया जानती है कि भारत की इकोनॉमी डेड है।” उन्होंने इसके लिए पीएम मोदी की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया और नोटबंदी, जीएसटी की खामियों, असफल ‘मेक इन इंडिया’, MSMEs के पतन और किसानों की उपेक्षा जैसे मुद्दों का हवाला दिया। वहीं, थरूर ने इस पर सीधे टिप्पणी करने से बचते हुए सिर्फ इतना कहा कि भारत हर साल अमेरिका को 90 अरब डॉलर से अधिक का एक्सपोर्ट करता है, और हमें इस साझेदारी को कमजोर नहीं होने देना चाहिए।
थरूर ने टैरिफ विवाद के हल के लिए दो अहम सुझाव भी दिए। पहला, भारत सरकार को अपने व्यापार वार्ताकारों को पूरी ताकत के साथ खड़ा करना चाहिए ताकि वे देश के लिए एक निष्पक्ष डील हासिल कर सकें। दूसरा, एक्सपोर्ट के अन्य क्षेत्रों से बातचीत करके अमेरिका से होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई की जा सकती है। गौरतलब है कि अमेरिका ने भारत पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जो अब 7 अगस्त से लागू होगा। यह टैरिफ स्टील, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स समेत कई प्रमुख क्षेत्रों को प्रभावित करेगा।
ट्रम्प प्रशासन का कहना है कि भारत को यह टैरिफ रूस से तेल और हथियार खरीदने की वजह से भुगतना पड़ रहा है। अमेरिका पहले से भारत पर 10% बेसलाइन टैरिफ लगाता रहा है, लेकिन अब इस दर को ढाई गुना बढ़ा दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति भारत-अमेरिका संबंधों को तनावपूर्ण बना सकती है। भारत सरकार ने कहा है कि वह टैरिफ के प्रभावों का मूल्यांकन कर रही है और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगी। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या कांग्रेस नेतृत्व का अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आता है या पार्टी एक रणनीतिक स्वर में इस मुद्दे पर आगे बढ़ती है।












