गिरिडीह जिले में जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया अब और पारदर्शी और क़ानूनी रूप से मजबूत होने जा रही है। 21 जुलाई 2025 से ज़मीन की रजिस्ट्री के लिए मुखिया द्वारा जारी वंशावली और एलपीसी (लैंड पोजिशन सर्टिफिकेट) को अमान्य घोषित कर दिया गया है। जिला निबंधन कार्यालय में इस बाबत नोटिस भी सार्वजनिक रूप से चस्पा कर दी गई है।

उपायुक्त रामनिवास यादव को लगातार मिल रही फर्जी दस्तावेज़ों की शिकायतों के बाद राजस्व विभाग की बैठक में यह कड़ा फैसला लिया गया। अब रजिस्ट्री के लिए केवल पंजी 2, केवाला, खतियान और शुद्धिपत्र जैसे आधिकारिक दस्तावेज़ ही मान्य होंगे। अवर निबंधक बालेश्वर पटेल ने पुष्टि की कि यह निर्णय डीसी के निर्देशानुसार लिया गया है।

अधिवक्ताओं और आम नागरिकों ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे ज़मीन संबंधी फर्जीवाड़े पर रोक लगाने और असली मालिकों को अधिकार दिलाने वाला बताया है। यह बदलाव ज़मीन खरीद-बिक्री में पारदर्शिता और वैधता सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम पहल मानी जा रही है।












