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WHEATHER UPDATE: झारखंड में आसमान से आफ़त! अगले चार दिन तगड़ी बारिश का अलर्ट, 8 जिलों में खतरे की घंटी

क्या आप झारखंड में रहते हैं? तो ज़रा सावधान हो जाइए! क्योंकि जो बादल अब तक राहत बनकर बरस रहे थे, वही अब आफ़त बनकर टूट सकते हैं। राज्य में मौसम का मिज़ाज पूरी तरह बिगड़ चुका है। आने वाले चार दिन बेहद भारी पड़ सकते हैं, खासकर उत्तर झारखंड के आठ जिलों के लिए। मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी कर दिया है और चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों तक तेज़ बारिश, गरज, वज्रपात और तेज़ हवाओं का कहर देखने को मिल सकता है।

भारतीय मौसम विभाग के रांची स्थित मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने जानकारी दी है कि झारखंड के उत्तरी हिस्से में स्थित देवघर, जामताड़ा, गिरिडीह, धनबाद, बोकारो, हजारीबाग, कोडरमा और चतरा जिलों में शनिवार को कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। इस दौरान येलो अलर्ट लागू रहेगा। यही नहीं, अगले चार दिनों तक राज्य के अन्य हिस्सों में भी गरज-चमक के साथ तेज़ हवाएं और वज्रपात की संभावना जताई गई है। वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि ये स्थितियां फसलों, बिजली आपूर्ति और लोगों की जान-माल के लिए ख़तरा बन सकती हैं। ऐसे में प्रशासन और जनता, दोनों को सतर्क रहना ज़रूरी है।

गुरुवार की देर शाम रांची में जो नज़ारा देखने को मिला, वह आने वाले खतरे की झलक था। सिर्फ ढाई घंटे में लगभग 50 मिमी बारिश ने राजधानी की सड़कों को जलमग्न कर दिया और ट्रैफिक ठप हो गया। अब जब मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और ज़्यादा तेज़ बारिश की संभावना जताई है, तो सवाल उठता है — क्या राज्य की तैयारी मुकम्मल है? क्या नगर निगम, बिजली विभाग और प्रशासन ने इस स्थिति से निपटने के लिए कोई ठोस योजना बनाई है? क्योंकि पिछली बार की तरह अगर इस बार भी जनता को अपने हाल पर छोड़ दिया गया, तो नालों की गंदगी और जलभराव एक बार फिर से सरकारी दावों की पोल खोल देगा।

रविवार को हालात और भी बिगड़ सकते हैं। मौसम विभाग के अनुसार, पलामू प्रमंडल के तीनों जिलों के साथ-साथ चतरा और हजारीबाग में भी कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना जताई गई है। खासतौर से ग्रामीण इलाकों में जहां ड्रेनेज की व्यवस्था नगण्य है, वहां स्थिति ज्यादा गंभीर हो सकती है। किसानों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, ताकि खेतों में खड़ी फसल बर्बाद न हो जाए। बिजली गिरने से जनहानि के खतरे को देखते हुए सरकार को चाहिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में सतर्कता अभियान चलाए, स्कूलों में अवकाश घोषित करे, और आपदा प्रबंधन को एक्टिव मोड में डाले।

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