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रांची में 30 करोड़ के 3 भव्य पार्क, इको, कम्युनिटी और रिक्रिएशनल पार्क को मिली हरी झंडी

रांची स्मार्ट सिटी को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है — ऐसी खबर जिसे सुनकर कुछ लोग कहेंगे, “वाह! सरकार तो कमाल कर रही है!” लेकिन क्या वाकई ऐसा है? क्या ये सिर्फ एक और ‘कागज़ी स्मार्टनेस’ है या वास्तव में जनता को मिलेगा उसका हक — सुकून, हरियाली और खुली हवा?
तीन भव्य पार्क, तीस करोड़ का खर्च, और एक सवाल — ये सब सिर्फ दिखावे के लिए तो नहीं?

रांची स्मार्ट सिटी को और खूबसूरत बनाने के नाम पर सरकार ने एक नया कदम उठाया है। स्मार्ट सिटी परिसर में अब तीन अत्याधुनिक पार्क बनाए जाएंगे — इको पार्क, कम्युनिटी पार्क और रिक्रिएशनल पार्क। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार ने इसकी मंजूरी दे दी है। विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार ने इन निर्माण कार्यों की ज़िम्मेदारी जुडको (Jharkhand Urban Infrastructure Development Company) को सौंपी है। डीपीआर तैयार है और निविदा प्रक्रिया जल्द शुरू होगी।

यह परियोजना दो पैकेजों में बंटी हुई है। पैकेज 1 में धुर्वा गोलचक्कर से हटिया डैम रोड तक, पेट्रोल पंप के पास 8 एकड़ क्षेत्र में सड़क के दोनों ओर पार्क का निर्माण होगा। पैकेज 2 के तहत मंत्री आवास के पास कम्युनिटी पार्क (3.98 एकड़) और निर्माणाधीन सिविक टॉवर के बगल में इको पार्क (3.19 एकड़) बनाया जाएगा। लगभग 30 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसमें फ्लोटिंग स्वायल माउंड, ब्रिज, ओपन जिम, चिल्ड्रेन प्ले एरिया, तालाब, स्टेप्प्ड फाउंटेन, फूड ज़ोन और 28 अलग-अलग सुविधाएं शामिल हैं। लेकिन सवाल वही — क्या आम आदमी को इन पार्कों तक असानी से पहुंच मिलेगी या ये सिर्फ VIP इलाकों की शोभा बनेंगे?

इको पार्क में पॉलीहाउस, स्कल्पचर प्लेटफॉर्म, परगोला, बैडमिंटन कोर्ट, ओपन जिम, चिल्ड्रेन प्ले ज़ोन, रेस्टोरेंट और यहां तक कि कमल फूल के विशेष तालाब तक बनाए जाएंगे। लेकिन क्या इस शानदार परियोजना में आम लोगों की राय ली गई? क्या इन क्षेत्रों में पहले से ही हरियाली और जरूरतें थीं या ये बस नगर विकास विभाग का ‘टेंडर यज्ञ’ है? खासकर जब शहर के कई हिस्सों में लोग साफ पानी, पैदल रास्तों और पब्लिक टॉयलेट के लिए तरस रहे हैं।

इस प्रोजेक्ट का 30 करोड़ रुपए का भारी-भरकम बजट ऐसे वक्त में पास किया गया है जब झारखंड के कई सरकारी स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्र बंद पड़े हैं और शहर की ट्रैफिक व्यवस्था खुद इलाज मांग रही है। सरकार का यह दावा कि “लोगों को सुकून के दो पल मिलेंगे”, तब तक अधूरा है जब तक ज़मीनी सच्चाई से उसका सामना नहीं कराया जाए।

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