नई दिल्ली: संसद भवन एनेक्सी में बुधवार को ‘एक देश-एक चुनाव’ को लेकर हुई संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की छठी बैठक में दो प्रमुख विशेषज्ञों — 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एन.के. सिंह और अर्थशास्त्री प्रोफेसर डॉ. प्राची मिश्रा — ने इस विचार को आर्थिक दृष्टिकोण से बेहद लाभकारी बताया। दोनों ने अपने संयुक्त प्रेजेंटेशन में कहा कि अगर लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाएं, तो इससे देश की GDP में 1.5% की बढ़ोतरी संभव है, जो कि मौजूदा आंकड़ों के अनुसार लगभग ₹4.5 लाख करोड़ के बराबर होगी।
हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी जोड़ा कि चुनावों के तुरंत बाद सरकार को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है, जिससे राजकोषीय घाटा 1.3% तक बढ़ सकता है। इसके बावजूद, लंबे समय में इसका सकारात्मक प्रभाव अर्थव्यवस्था, प्रशासन और समाज पर अधिक व्यापक रूप से दिखाई देगा। बार-बार चुनावों के कारण देश के विभिन्न क्षेत्रों—जैसे मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन, टूरिज्म और हेल्थ—पर भारी असर पड़ता है, जिससे उत्पादकता और संसाधनों का दुरुपयोग होता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि बार-बार चुनावों से प्रवासी मजदूरों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है, क्योंकि वे मतदान के लिए बार-बार घर लौटते हैं, जिससे उनके कामकाज और कमाई पर असर पड़ता है। इसके अलावा, स्कूलों को बार-बार पोलिंग स्टेशन बनाए जाने से शिक्षा व्यवस्था भी बाधित होती है, जिससे स्कूलों में नामांकन 0.5% तक घट जाता है। शिक्षकों की बार-बार चुनावी ड्यूटी से शिक्षण कार्य प्रभावित होता है, और पुलिस बल की लगातार तैनाती के कारण आम अपराधों पर नियंत्रण कमजोर हो जाता है।
एक्सपर्ट्स ने इस बात पर भी जोर दिया कि बार-बार चुनावों के कारण देश लगातार ‘चुनावी मोड’ में बना रहता है, जिससे लोकलुभावन वादों की बाढ़ आती है और सरकारें दीर्घकालिक विकास की बजाय अल्पकालिक लोकप्रिय फैसलों पर ध्यान देती हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि 1986 के बाद से ऐसा कोई साल नहीं आया है जब भारत में चुनाव नहीं हुए हों। इस कारण प्रशासनिक कामकाज, नीतिगत फैसले और विकास योजनाएं बार-बार रुकती हैं।
JPC की इस बैठक से संकेत मिलता है कि सरकार अब ‘एक देश-एक चुनाव’ को सिर्फ चुनाव सुधार के रूप में नहीं, बल्कि आर्थिक और प्रशासनिक मजबूती के कदम के रूप में भी देख रही है। आगे इस विचार को लागू करने के लिए संविधानिक संशोधन और राजनीतिक सहमति आवश्यक होगी, लेकिन विशेषज्ञों की रिपोर्ट ने इसकी दिशा में बहस को तेज कर दिया है।












