गुजरात और मुंबई में हाल ही में दो बड़े ड्रग्स तस्करी के मामले सामने आए हैं, जिससे देश में मादक पदार्थों की तस्करी को लेकर एक बार फिर चिंता गहराई है। करीब चार महीने पहले इंडियन कोस्ट गार्ड (ICG) और गुजरात एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) ने संयुक्त ऑपरेशन में समुद्र के रास्ते लाई जा रही 300 किलो ड्रग्स की एक भारी खेप पकड़ी थी। यह ऑपरेशन 12-13 अप्रैल की रात को पोरबंदर से लगभग 190 किलोमीटर दूर समुद्र में अंजाम दिया गया था। बरामद की गई ड्रग्स की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 1800 करोड़ रुपये बताई गई थी।
इस ऑपरेशन को ड्रग्स तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता माना जा रहा है, क्योंकि समुद्री मार्ग से होने वाली तस्करी अक्सर खुफिया एजेंसियों के लिए चुनौती बनती रही है। यह खेप अंतरराष्ट्रीय तस्करों द्वारा भारतीय समुद्र तट के जरिए देश में प्रवेश कराने की कोशिश थी, लेकिन समय रहते सुरक्षा एजेंसियों ने इसे विफल कर दिया। इस मामले में कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया गया था और उनसे पूछताछ जारी है।
वहीं दूसरी ओर, मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर कस्टम डिपार्टमेंट ने 29 और 30 जुलाई को दो अलग-अलग फ्लाइट्स से आए चार यात्रियों के पास से कुल 8 किलो हाइड्रोपोनिक गांजा (वीड) बरामद किया। यह गांजा बैंकॉक से आई दो फ्लाइट्स – वीजी760 और 6E1060 – से लाया जा रहा था। पहले मामले में 1.99 किलो गांजा मिला जिसकी कीमत करीब 2 करोड़ रुपए है, जबकि दूसरे में 6.22 किलो गांजा बरामद हुआ जिसकी कीमत लगभग 6 करोड़ रुपए है। कुल मिलाकर 8 करोड़ की ड्रग्स बरामद की गई।
कस्टम और पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सभी यात्रियों ने गांजा ट्रॉली बैग्स के अंदर काले और पारदर्शी वैक्यूम सील पैकेट्स में छिपा रखा था। चारों आरोपियों को NDPS एक्ट, 1985 के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है और अब उनसे पूछताछ जारी है कि वे किसके लिए यह खेप ला रहे थे। इन दो बड़ी घटनाओं से साफ है कि तस्कर समुद्री रास्ते से लेकर हवाई मार्ग तक हर तरीका अपनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सतर्क सुरक्षा एजेंसियां लगातार ऐसे प्रयासों को नाकाम कर रही हैं।












