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Ganderbal में बड़ा हादसा: ITBP जवानों से भरी बस सिंध नदी में गिरी, बाल-बाल बचे जवान!

कश्मीर की वादियों में जब बारिश राहत बनकर नहीं, बल्कि आफ़त बनकर बरसती है—तो फौज भी उसके सामने बेबस नज़र आती है। मंगलवार की रात एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला हादसा हुआ, जिसने पूरे सुरक्षा तंत्र को झकझोर कर रख दिया। ITBP के बहादुर जवानों को ले जा रही एक बस, तेज़ बारिश के बीच सिंध नदी में समा गई। चारों तरफ अंधेरा, बहती तेज़ धार, और जवानों की चीख़-पुकार—यह मंजर किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था, लेकिन यह हकीकत थी… और बेहद भयावह।

घटना जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले के कुल्लन इलाके में हुई। ITBP (भारत तिब्बत सीमा पुलिस) के जवानों को लेकर जा रही बस भारी बारिश और फिसलन की वजह से अनियंत्रित होकर सीधे सिंध नदी में जा गिरी। जानकारी के अनुसार, यह हादसा तब हुआ जब बस एक मोड़ पर फिसली और ड्राइवर के नियंत्रण से बाहर हो गई। बस नदी में गिरते ही मौके पर चीख-पुकार मच गई, और स्थानीय लोग व सेना के रेस्क्यू दल तुरंत हरकत में आ गए।

हालांकि हादसा बड़ा था, लेकिन गनीमत रही कि सभी जवानों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। स्थानीय पुलिस, सेना और NDRF की टीमों ने तेज़ रफ्तार में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और पानी में डूबी बस तक पहुंचकर जवानों को निकाला। वीडियो फुटेज में देखा जा सकता है कि किस तरह बचावकर्मी पूरी रात पानी में उतरकर बस तक पहुंचे और अंदर फंसे जवानों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। हालांकि, बस के ड्राइवर को गंभीर चोटें आईं, जिसे नज़दीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक और चौंकाने वाली बात सामने आई—बस में रखे गए कुछ हथियार लापता हैं। जवानों को तो बचा लिया गया, लेकिन अब चिंता इस बात की है कि कहीं हथियार नदी में बह न गए हों या किसी गलत हाथों में न पहुंच जाएं। ऐसे में तलाशी अभियान अभी जारी है और बचाव दल सिंध नदी के बहाव क्षेत्र में तलाशी ले रहे हैं। सवाल उठता है कि क्या बस की तकनीकी खामी या फिर प्रशासनिक लापरवाही इस हादसे के लिए जिम्मेदार है?

घटना के बाद जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि बस में कुल कितने जवान सवार थे, और हादसा तकनीकी खराबी, मौसम या मानवीय गलती की वजह से हुआ। की पड़ताल में ये बातें सामने आ रही हैं कि जिस रूट पर बस चल रही थी, वहां बारिश के कारण सड़क की हालत बेहद खराब थी। क्या स्थानीय प्रशासन ने इस खतरे को पहले से भांप कर कोई वैकल्पिक उपाय नहीं किया था? यह जांच का विषय है।

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