जिस नाम को पुलिस ढूंढती रही, वो नाम असली था ही नहीं। जिस पहचान पर केस दर्ज था, वो एक झूठ का मुखौटा थी। और जिस इंसान ने पुलिस को भ्रम में रखा, वो खुद अमन सिंह जैसे हाई-प्रोफाइल गैंगस्टर की हत्या का बड़ा खिलाड़ी निकला! जी हां, हम बात कर रहे हैं रितेश यादव उर्फ सुंदर महतो की, जिसे धनबाद जेल में यूपी के कुख्यात गैंगस्टर अमन सिंह की हत्या के मामले में संदेहास्पद भूमिका के चलते उठाया गया था। लेकिन अब जो सज़ा हुई है, वह हत्या के लिए नहीं बल्कि पुलिस को जानबूझकर गुमराह करने और फर्जी पहचान देने के लिए हुई है।
धनबाद की प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी नूतन एक्का की अदालत ने आरोपी रितेश यादव को तीन साल की सश्रम कैद और पांच हजार रुपए जुर्माने की सज़ा सुनाई है। आरोपी ने अपनी असली पहचान छुपाकर खुद को सुंदर महतो बताया था, जिससे पुलिस की जांच भटक गई थी। 25 नवंबर 2023 को पुटकी थाना पुलिस ने उसे डीएवी मैदान मुनीडीह से चोरी की बाइक के साथ गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उसने खुद को बोकारो निवासी बताया, लेकिन जब 3 दिसंबर को अमन सिंह की हत्या हुई और रितेश की भूमिका सामने आई, तब जांच का रुख बदल गया।
पुलिस रिमांड के दौरान रितेश यादव ने कबूल किया कि उसका असली नाम रितेश यादव है, और वह यूपी के प्रतापगढ़ जिले का रहने वाला है। बोकारो पुलिस की भी रिपोर्ट में यह साफ हो गया कि तेलो चंद्रपुरा में सुंदर महतो नाम का कोई व्यक्ति मौजूद नहीं है। यानि आरोपी ने न सिर्फ अपनी असली पहचान छुपाई बल्कि जांच की दिशा भी जानबूझकर बदलने की कोशिश की। यूपी के अमन सिंह पर जेल में हुई गोलीबारी के मामले में भी रितेश की संदिग्ध भूमिका पर जांच अभी जारी है, लेकिन पहचान छुपाने के मामले में अदालत ने उसे दोषी ठहरा दिया है।
इसी बीच पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह की हत्या मामले में भी अदालत में बहस तेज़ हो गई है। इस केस में झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह पिछले आठ वर्षों से जेल में हैं। उनके वकील मिलन दे ने अदालत में तर्क देते हुए कहा कि घटना के तुरंत बाद पुलिस ने मौके से सबूत इकट्ठे कर लिए थे, सनहा भी दर्ज किया गया, पोस्टमार्टम भी हुआ, तो फिर बाद में अभिषेक सिंह द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर की वैधता संदेहास्पद है। अदालत ने बचाव पक्ष को बहस जारी रखने के लिए 26 जुलाई की तारीख दी है।












