सोचिए, आप हाईवे पर वाहन चला रहे हों और अचानक आपकी आंखों के सामने 12 फीट गहरा गड्ढा रास्ता निगल ले! गिरिडीह में कुछ ऐसा ही हुआ, जिसने लोगों के रोजमर्रा के सफर को खतरे में डाल दिया है। भारी बारिश के बीच जमीन का यह खुला जख्म, न सिर्फ सिस्टम की पोल खोल रहा है, बल्कि आने वाले खतरे की चेतावनी भी दे रहा है। क्या गिरिडीह अब ‘धरती फटने’ की मार झेलेगा?
गिरिडीह जिले में लगातार हो रही बारिश अब प्राकृतिक आपदा का रूप ले चुकी है। मंगलवार को गिरिडीह-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित योगीटांड इलाके में अचानक सड़क फट गई और उसमें लगभग 12 फीट गहरा गड्ढा बन गया। गड्ढा ठीक सड़क के बीचोबीच बना, जिससे एक ओर जहां आवागमन पूरी तरह से बाधित हो गया, वहीं लोगों में दहशत का माहौल भी देखने को मिला। सूचना मिलते ही मुफ्फसिल थाना पुलिस मौके पर पहुंची और क्षेत्र को सील कर दिया गया। वहीं सीसीएल की तकनीकी टीम भी अलर्ट मोड में आ गई है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए गिरिडीह के डीसी रामनिवास यादव और एसपी डॉ. विमल कुमार ने खुद घटनास्थल का रात में निरीक्षण किया। मौके पर मौजूद अधिकारियों को तत्काल रूट डायवर्ट, बैरिकेडिंग और सुरक्षा इंतजामों के निर्देश दिए गए। ट्रैफिक डीएसपी कौसर अली के नेतृत्व में हाईवे को दोनों ओर से सील कर दिया गया है। खास बात यह है कि यह इलाका समाहरणालय से कुछ ही दूरी पर स्थित है और इसी सड़क से अधिकांश वरिष्ठ अधिकारी और प्रमुख सरकारी वाहन गुजरते हैं। प्रशासन इस पूरे इलाके को अब संवेदनशील जोन मानकर चल रहा है।
स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए प्रशासन ने भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी है और आम जन के लिए अस्थायी डायवर्जन लागू कर दिया गया है। सड़क पर बने गड्ढे को भरने और उसकी मरम्मत का काम तेजी से चल रहा है। मौके पर डीएसपी नीरज कुमार सिंह, ट्रैफिक इंस्पेक्टर डुगनू टोपनो, मुफ्फसिल थाना प्रभारी श्याम किशोर महतो समेत सीसीएल के तकनीकी अफसर और जवान मौजूद हैं। फिलहाल जिला प्रशासन पूरी स्थिति पर निगरानी बनाए हुए है और हर घंटे अपडेट ले रहा है।
जिला प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे इस मार्ग पर यात्रा करने से फिलहाल परहेज करें और वैकल्पिक मार्ग का प्रयोग करें। भू-धंसान जैसी घटनाएं न केवल सड़क तंत्र की खामियां उजागर करती हैं, बल्कि यह आने वाले बड़े संकट की ओर भी इशारा कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बारिश इसी तरह जारी रही, तो अन्य इलाकों में भी ज़मीन धंसने की घटनाएं सामने आ सकती हैं।












