झारखंड में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है, लेकिन इस बार ये करवट सामान्य नहीं—जानलेवा है। संथाल परगना के आसमान पर मंडरा रहा बादलों का भारी दल, सिर्फ बारिश ही नहीं, मौत भी लेकर आया। पाकुड़ जिले में खेत की ओर शौच के लिए निकले दो युवक वज्रपात की चपेट में आ गए—एक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरा जिंदगी की जंग लड़ रहा है। झारखंड के 12 जिलों में जारी यलो अलर्ट अब सिर्फ मौसम की चेतावनी नहीं, एक खुला इशारा है कि सावधानी न बरती तो हालात भयावह हो सकते हैं।
पिछले 48 घंटों में झारखंड के कई हिस्सों में मानसून ने जमकर अपना रंग दिखाया है। धनबाद के टूंडी में सबसे अधिक 174 मिमी वर्षा दर्ज की गई, वहीं जामताड़ा, गिरिडीह, मधुपुर और पाकुड़ जैसे जिले भी मूसलाधार बारिश की चपेट में रहे। राजधानी रांची में 17.2 मिमी बारिश दर्ज की गई, परंतु उससे अधिक प्रभाव पूर्वी और उत्तरी झारखंड पर पड़ा। जामताड़ा के करमाटांड में 148.6 मिमी, नारायणपुर में 140 मिमी, गिरिडीह में 117 मिमी और मधुपुर में 102.8 मिमी वर्षा हुई। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि इन क्षेत्रों में मानसून पूरे वेग से सक्रिय है।
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान में जो बारिश हो रही है वह अरब सागर से लेकर बांग्लादेश तक फैले लो प्रेशर टर्फ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन की देन है। गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ होते हुए यह टर्फ झारखंड से पश्चिम बंगाल तक सक्रिय है। साथ ही, एक और टर्फ समुद्र तल से 0.9 से 3.1 किमी ऊंचाई तक बिहार से मणिपुर तक बना हुआ है, जिसका असर झारखंड के मौसम पर साफ दिखाई दे रहा है। मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि यह सिस्टम न केवल बारिश बल्कि तापमान में गिरावट का भी कारण बना है। अगले तीन दिनों तक राज्य में राहत तो रहेगी, लेकिन फिर तापमान में 4 डिग्री तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
झारखंड में इस मानसून सीजन में अब तक औसत से 53% अधिक वर्षा हो चुकी है। राज्य में कुल 748.6 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जबकि सामान्य वर्षापात 489.2 मिमी होता है। रांची में तो 976.3 मिमी बारिश हुई है, जो औसत से 94% अधिक है। यह अत्यधिक वर्षा जहां एक ओर खेतों के लिए वरदान हो सकती है, वहीं दूसरी ओर वज्रपात और बाढ़ जैसे खतरे लोगों की जान और जीविका पर भारी पड़ सकते हैं। ग्रामीण इलाकों में बिजली गिरने से जान जाने की घटनाएं प्रशासन के लिए चिंता का विषय हैं।












