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‘पाकिस्तान को बचाकर आपको क्या मिलेगा?’ लोकसभा में अमित शाह का पी. चिदंबरम पर तंज

संसद की भारी फिक्र और गहमागहमी के बीच जब चर्चा चल रही थी पहलगाम आतंकी हमले की सच्चाई पर, तब अचानक विवाद की ज्वाला फूटी। पूर्व गृहमंत्री पी. चिदंबरम के बयान ने राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ये साबित हो चुका है कि हमला करने वाले आतंकवादी वाकई पाकिस्तान से थे? क्या हो सकता है कि ये आतंकी हमारे देश के ही लोग हों? ऐसे सवालों ने गृहमंत्री अमित शाह के गुस्से को भड़काया, जो संसद में सीधे चिदंबरम पर कड़े शब्दों में बरसे। इस बहस में खुलासा हुआ कि भारतीय सेना के पास जिन तीन आतंकवादियों को सोमवार को मार गिराया गया, वे सचमुच पाकिस्तानी थे और उनके पास पाकिस्तानी वोटर आईडी, राइफल और चॉकलेट जैसे सबूत मौजूद थे।

मंगलवार, 29 जुलाई 2025 को लोकसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने पूरे ऑपरेशन महादेव का ब्यौरा देते हुए साफ किया कि भारत की सेना ने जिस आतंकवादियों को ढेर किया, वे तीनों पाकिस्तानी आतंकवादी थे। ये वही आतंकी थे जो पहलगाम हमले में शामिल थे। उनके पास से मिली पाकिस्तानी वोटर आईडी, पाकिस्तानी राइफलें और पाकिस्तान की बनी चॉकलेट इस बात के पुख्ता सबूत हैं। वहीं, पूर्व गृहमंत्री पी. चिदंबरम के हालिया बयान पर अमित शाह ने सवाल किया कि क्या वे जानबूझकर पाकिस्तान को क्लीन चिट दे रहे हैं? उन्होंने कहा, “पाकिस्तान को बचाकर आपको क्या मिलेगा?”

अमित शाह ने पी. चिदंबरम के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि उन्होंने इस मामले में बिना सबूतों के सवाल उठाए जो पूरी तरह से गलत है। शाह ने कहा, “अगर सबूत चाहिए तो मैं देने को तैयार हूं, पूरे देश के सामने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी।” उन्होंने आगे कहा कि चिदंबरम साहब का ये रवैया देश विरोधी है, जो पाकिस्तान को राहत देने जैसा है। उन्होंने साफ कहा कि आतंकवादी पाकिस्तानी ही थे और यह दावा करना कि वे भारत के लोग हो सकते हैं, देश की सुरक्षा के खिलाफ है। अमित शाह ने इसे एक षड्यंत्र बताते हुए कहा कि इस प्रकार के बयान देश के हित में नहीं हैं।

पूर्व गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने विवाद बढ़ने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि उनके बयान के कुछ हिस्सों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पूरी तरह साफ किया है कि उनका इरादा किसी को बचाना या दोषमुक्त करना नहीं था, बल्कि सवाल उठाना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मीडिया ने उनके बयान के कुछ हिस्सों को गलत तरीके से फैलाकर राजनीतिक माहौल को खराब किया। हालांकि, उनकी इस सफाई के बाद भी राजनीतिक सियासत में तूफान शांत नहीं हुआ है।

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