क्या झारखंड एक बार फिर किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा की ओर बढ़ रहा है? क्या बारिश इस बार सिर्फ राहत नहीं, बल्कि आफ़त भी बन सकती है? मौसम विभाग की ताज़ा चेतावनी और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने लोगों की चिंताओं को और गहरा कर दिया है। झारखंड के कई ज़िले इन दिनों मानसून की बौछारों से पूरी तरह भीग चुके हैं, लेकिन इस बार बादल सिर्फ पानी नहीं, सावधानी का अलर्ट भी बरसा रहे हैं। ख़ासकर जिन इलाकों में नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, वहां ज़रा सी लापरवाही बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि 29 जुलाई से 1 अगस्त तक झारखंड के दक्षिणी, पूर्वी और उत्तरी क्षेत्रों में तेज हवाओं, गरज-चमक और भारी वर्षा की संभावना है। इसे देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया गया है। राजधानी रांची में सोमवार को बादल छाए रहने और एक-दो बार हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। लेकिन सिर्फ अनुमान से काम नहीं चलेगा, क्योंकि पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला में पिछले 24 घंटों में 192.6 मिमी बारिश दर्ज की गई है — जो सामान्य से कई गुना ज्यादा है। देवघर में 10 मिमी, रांची और चाईबासा में 2-2 मिमी और मेदिनीनगर में 4 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है।
इस भारी बारिश का सबसे गहरा असर नदियों के जलस्तर पर देखा जा रहा है। झारखंड की स्वर्णरेखा और खरकई नदियां अब खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। प्रशासन अलर्ट पर है, लेकिन क्या गांवों तक समय रहते चेतावनी पहुंच पाई है? क्या राहत व बचाव के इंतज़ाम पहले से किए गए हैं? ये सवाल ज़मीनी हकीकत के जवाब मांग रहे हैं। इस बीच IMD ने भी लोगों से खराब मौसम में घरों से बाहर न निकलने, सुरक्षित स्थानों पर रहने और बिजली गिरने की स्थिति में विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।
2025 में अब तक झारखंड में मानसून ने अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन किया है। 1 जून से लेकर अब तक राज्य में कुल 717.2 मिमी बारिश हो चुकी है, जबकि सामान्य आंकड़ा 455.9 मिमी का होता है। यानी इस बार औसत से 57% अधिक बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी सिंहभूम में सर्वाधिक 1134.6 मिमी, और राजधानी रांची में 961.8 मिमी वर्षा हो चुकी है। जहां एक ओर यह किसानों के लिए राहत है, वहीं दूसरी ओर शहरी और ग्रामीण इलाकों में बाढ़ की आशंका चिंता बढ़ा रही है।












