क्या आपको पता है कि हरियाली तीज पर बेटी के घर भेजे जाने वाला सिंजारा सिर्फ एक उपहार नहीं, बल्कि एक पारंपरिक व धार्मिक जिम्मेदारी है? और यदि इसमें की गई एक छोटी सी गलती, रिश्तों में दूरियां बढ़ा सकती है। हर साल सावन के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाई जाने वाली यह तीज, इस बार 27 जुलाई 2025 को आ रही है। पर इससे एक दिन पहले आता है सिंधारा दूज – यानी जब मायके से बेटी के ससुराल सिंजारा भेजा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस सजीले सिंजारे में कुछ चीजें भूलकर भी नहीं रखनी चाहिए? अगर रखीं, तो रिश्तों में पड़ सकती है दरार, और शुभ अवसर बन सकता है अशुभ।
हरियाली तीज पर भेजा जाने वाला सिंजारा महज एक भेंट नहीं, बल्कि एक भावनात्मक और सांस्कृतिक संवाद होता है। इसमें माँ-बाप अपनी बेटी के सुख, सौभाग्य और समृद्धि की कामना करते हुए वस्तुएं भेजते हैं। इस उपहार में अक्सर भेजी जाती हैं – हरी चूड़ियां, बिंदी, पायल, झुमके, कमरबंद, मांग टीका, मेहंदी, अंगूठी, मावे की बर्फी, घेवर, रसगुल्ला और सिंदूर जैसे सुहाग चिन्ह। राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर भारत के कई हिस्सों में इस दिन की एक अलग ही रौनक होती है। महिलाएं मेंहदी रचाती हैं, लोकगीत गाती हैं और पकवानों का आनंद लेती हैं। इस पर्व की खासियत यह है कि ये नारी शक्ति और सौंदर्य की पूजा के साथ-साथ पारिवारिक बंधन को और मजबूत करने का जरिया बनता है।
लेकिन अब बात करते हैं उन चीज़ों की, जिन्हें सिंजारे में रखना मना है। ज्योतिष और परंपरा दोनों का मानना है कि काले और सफेद रंग के वस्त्र सिंजारे में नहीं भेजने चाहिए। काला रंग नकारात्मकता, अशुभता और वैराग्य का प्रतीक माना जाता है। धातु की चूड़ियां भी वर्जित हैं – इसके स्थान पर कांच की चूड़ियों को शुभ माना जाता है। इसके अलावा, नुकीली वस्तुएं जैसे सुई, चाकू या कांटे जैसे आइटम, उपहार में देना शुभ नहीं माना जाता। एक और महत्वपूर्ण बात: कभी भी किसी और द्वारा दी गई पुरानी सुहाग सामग्री सिंजारे में न भेजें। हमेशा नई और शुभ वस्तुएं ही भेजें, ताकि बेटी के जीवन में सौभाग्य और सकारात्मकता बनी रहे।












