क्या पाकिस्तान आतंकवाद से हाथ धो चुका है या फिर यह बस एक और अंतरराष्ट्रीय मंच पर मासूम बनने की नौटंकी है? क्या अमेरिका के इस ताजा फैसले ने पाकिस्तान की पोल खोल दी है? हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले, जिसमें निर्दोष नागरिकों की जान गई, उसकी जिम्मेदारी लेने वाले संगठन TRF (द रेजिस्टेंस फ्रंट) को अमेरिका ने अब विदेशी आतंकवादी संगठन (FTO) और वैश्विक आतंकी (SDGT) घोषित कर दिया है। लेकिन इस पर पाकिस्तान का जवाब हैरान करने वाला है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने वॉशिंगटन डीसी में अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात के बाद कहा – “हमें कोई आपत्ति नहीं, अगर TRF को लेकर कोई सबूत है, तो हमें सौंपिए!” सवाल यह है कि क्या यह कथन एक साफ छवि दिखाने की कोशिश है या पर्दे के पीछे की रणनीति?
भारत और अमेरिका दोनों ही TRF को लश्कर-ए-तैयबा का नया चेहरा मानते हैं — वह संगठन जिसने मुंबई हमलों से लेकर कश्मीर की कई घटनाओं तक आतंक का लंबा इतिहास लिखा है। TRF ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में जो हमला किया, उसमें कई आम नागरिक मारे गए। लेकिन पाकिस्तान अब भी इससे दूरी बनाए हुए दिखता है। इशाक डार का दावा है कि “लश्कर-ए-तैयबा को तो पाकिस्तान ने वर्षों पहले खत्म कर दिया था, कई गिरफ्तारियां हुईं, संगठन तबाह हुआ। TRF से हमारा कोई लेना-देना नहीं।” हैरानी की बात ये है कि उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान ने UNSC (संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद) से TRF का नाम हटवाने के लिए दबाव बनाया था। यानी हमला भी हुआ, नाम भी सामने आया, मगर पाकिस्तान ने नाम हटवा दिया — ये क्या दोहरी नीति नहीं?
भारत ने TRF को जनवरी 2023 में ही UAPA कानून के तहत आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया था। और तब से भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर TRF के खिलाफ सबूत पेश करता रहा है। 2023, मई 2024 और नवंबर 2024 में भारत ने संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध समिति को सबूत सौंपे थे, जिसमें TRF के सोशल मीडिया प्रचार, फंडिंग और हमलों का पूरा खाका था। दक्षिण एशिया आतंकवाद पोर्टल के अनुसार TRF का गठन 2019 में हुआ और इसने श्रीनगर में ग्रेनेड हमलों, टारगेट किलिंग और सैनिकों पर हमलों की जिम्मेदारी ली है। भारत की तरफ से साफ तौर पर कहा गया है कि TRF पाकिस्तानी फौज और ISI के समर्थन से जम्मू-कश्मीर में अस्थिरता फैलाने का माध्यम है।












