क्या झारखंड के युवाओं की किस्मत बदलने वाली है? क्या आने वाले समय में राज्य को एक और सैनिक स्कूल मिलने जा रहा है, जो देशभक्ति, अनुशासन और सेवा भावना की शिक्षा बचपन से देगा? इन सवालों के जवाब उस अहम बैठक में छिपे हैं, जिसकी अध्यक्षता खुद मुख्य सचिव अलका तिवारी ने की। यह बैठक सिर्फ किसी सरकारी फाइल का हिस्सा नहीं, बल्कि झारखंड के सैन्य शिक्षा भविष्य की री-डिजाइनिंग का संकेत मानी जा रही है।
क्या आप जानते हैं कि तिलैया सैनिक स्कूल में देशभर के किसी भी सैनिक स्कूल की तुलना में सबसे अधिक छात्र – करीब 875 पढ़ाई कर रहे हैं? यह संख्या न सिर्फ राज्य की शिक्षा क्षमता पर सवाल खड़ा करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि झारखंड जैसे बड़े राज्य में सिर्फ एक सैनिक स्कूल अब अपर्याप्त साबित हो रहा है। बैठक में इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए, स्कूली शिक्षा विभाग को निर्देश दिया गया कि वह नए सैनिक स्कूल की स्थापना को लेकर औपचारिक प्रक्रिया शुरू करे। यह एक ऐसा फैसला हो सकता है जो राज्य के हज़ारों युवाओं के जीवन को नई दिशा दे।
बैठक में सिर्फ भविष्य की योजनाएं ही नहीं बनीं, बल्कि मौजूदा सैनिक स्कूल तिलैया की वर्षों से चली आ रही समस्याओं को भी प्राथमिकता दी गई। 9.49 करोड़ रुपये की लागत से एक नई जलापूर्ति योजना को मंज़ूरी दी गई, जिसकी तकनीकी स्वीकृति पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से मिल चुकी है। यही नहीं, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, स्टाफ क्वार्टरों की मरम्मत, और भवनों की स्थिति को सुधारने के निर्देश भवन निर्माण विभाग को दिए गए। छात्रों की वार्षिक स्वास्थ्य जांच अब कोडरमा में ही कराई जाएगी, जिससे उन्हें हजारीबाग जाने की मशक्कत से राहत मिलेगी। यह सिर्फ सुविधाएं नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माता छात्रों के लिए एक सशक्त आधारभूत ढांचा है।
बैठक में एक और अहम मुद्दा उठाया गया – सैनिक स्कूल तिलैया के कर्मियों की पेंशन, पारिवारिक पेंशन और एनपीएस संबंधी वित्तीय ज़रूरतों का। प्रस्ताव के अनुसार, सरकार को इन मदों पर लगभग 7 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। मुख्य सचिव ने इस पर तत्काल फैसला लेने की बजाय संवेदनशील और संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए स्कूली शिक्षा विभाग को निर्देशित किया कि वे अन्य राज्यों के सैनिक स्कूल मॉडल का अध्ययन करें।












