Aba News

JPSC Result :7 बार असफल… फिर भी नहीं टूटी! बेरमो की बेटी ने इतिहास रच दिया

जब लगातार मिल रही हार आपकी आत्मा को चीरने लगे… जब सपने बोझ बन जाएं… जब लोग ताने मारने लगें और हालात हर तरफ से जकड़ लें — तब क्या कोई फिर भी मुस्कुरा सकता है? क्या कोई सातवीं बार गिरकर फिर भी उठ सकता है? इस असंभव को संभव कर दिखाया है बेरमो (झारखंड) की कुमारी स्वाति ने। सात बार JPSC में हारने के बाद, उन्होंने आठवीं बार अपनी किस्मत नहीं — अपनी मेहनत से जीत लिखी। यह कहानी किसी भी ‘सफलता का फार्मूला’ नहीं, बल्कि एक मानव जज़्बे की जीत है — जिसे आपको जानना चाहिए, समझना चाहिए, और सराहना चाहिए।

कुमारी स्वाति, एक साधारण शिक्षक की बेटी हैं, लेकिन उनका सपना साधारण नहीं था। उन्होंने भौतिकी में स्नातक किया और फिर विनोबा भावे विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री ली। लेकिन यह सिर्फ डिग्री की बात नहीं थी। उनका मकसद था — एक ऐसा पद, जहां से वे शिक्षा व्यवस्था को भीतर से सुधार सकें। जब उन्होंने पहली बार JPSC परीक्षा दी, तब उन्हें भी नहीं पता था कि चार बार लगातार उसी परीक्षा में असफल होना उनकी कहानी का हिस्सा बन जाएगा। लेकिन जहाँ ज्यादातर लोग हार मान लेते हैं, वहीं स्वाति ने इन असफलताओं को “सेल्फ-ट्रेनिंग” माना। उन्होंने खुद से वादा किया — “अब रुकना नहीं है।”

कई लोगों के लिए परीक्षा की तैयारी ही काफी थकान भरा होता है, लेकिन स्वाति के लिए ये और कठिन था। वह भारत के महालेखापरीक्षक (CAG) कार्यालय में ऑडिटर के पद पर कार्यरत थीं, और उसी के साथ रात-रातभर पढ़ाई करती थीं। सरकारी नौकरी के दवाब, घर की जिम्मेदारियां और मानसिक थकावट — ये सब मिलकर एक चक्रव्यूह बनाते हैं, जिसमें फँसकर लोग अक्सर अपने सपनों से समझौता कर लेते हैं। लेकिन स्वाति ने हर जिम्मेदारी को अपनी ताकत में बदला। उन्होंने दिखा दिया कि “डेडिकेशन” सिर्फ एक शब्द नहीं, एक संकल्प होता है।

और फिर आई वो सुबह, जिसका इंतजार सालों से था। 11वीं JPSC परीक्षा में 127वीं रैंक के साथ कुमारी स्वाति ने न सिर्फ एक सरकारी पद हासिल किया, बल्कि खुद को साबित किया। अब वह झारखंड शिक्षा सेवा में अधिकारी के रूप में कार्य करेंगी। यह पद सिर्फ एक सरकारी टेबल और कुर्सी नहीं है, बल्कि उस पूरी पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा है जो हर असफलता को अंत मान लेती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

यह भी पढ़ें