गिरिडीह जिले के डुमरी प्रखंड के कुशमाकुरा गाँव में डायरिया ने अचानक गंभीर रूप ले लिया है, जिससे पूरे गाँव में अफरा-तफरी मच गई है। खासकर एक पूरे मोहल्ले में डायरिया के केस तेजी से बढ़े हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार अब तक करीब 40 से 50 लोग इस संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। ग्रामीणों में डर का माहौल है और लोग दहशत में हैं कि कहीं यह बीमारी और ना फैल जाए। वहीं, जिन पांच लोगों की स्थिति गंभीर बताई जा रही है, उन्हें तुरंत गिरिडीह सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
जानकारी के मुताबिक मंगलवार की शाम से ही लोगों में उल्टी-दस्त की शिकायतें शुरू हुई थीं। शुरुआत में इसे सामान्य मौसमी बीमारी समझकर नजरअंदाज किया गया, लेकिन बुधवार तक हालात बिगड़ते चले गए। ग्रामीणों ने जब देखा कि घरेलू उपाय और स्थानीय स्तर पर इलाज से राहत नहीं मिल रही है, तो कई मरीजों को इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। स्थिति गंभीर होने पर डॉक्टरों ने 5 मरीजों को सदर अस्पताल रेफर कर दिया, जहाँ उनका इलाज अब चल रहा है।
इस बीमारी के फैलने के पीछे संभावित कारण दूषित पानी को माना जा रहा है। स्थानीय स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में बताया गया है कि गाँव में स्वच्छ पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है। ग्रामीण अब भी बोरिंग और कुएँ के पानी पर निर्भर हैं। आशंका जताई जा रही है कि पानी के इन स्रोतों में किसी तरह की गंदगी या बैक्टीरिया के कारण यह संक्रमण फैला हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गाँव पहुँचकर पानी के सैंपल लिए हैं और लैब जांच शुरू कर दी गई है।
डायरिया के इस कहर ने ग्रामीणों को झकझोर कर रख दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने एहतियात के तौर पर इलाके में दवाओं का छिड़काव और जागरूकता अभियान शुरू कर दिया है। साथ ही लोगों से उबला हुआ पानी पीने और साफ-सफाई बनाए रखने की अपील की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय पर रोकथाम नहीं की गई, तो डायरिया गाँव के अन्य हिस्सों में भी फैल सकता है। फिलहाल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।












