गिरिडीह के परिसदन भवन में हूल दिवस के मौके पर संथाल विद्रोह के अमर योद्धाओं सिद्धो-कान्हू को श्रद्धांजलि दी गई। झारखंड सरकार के मंत्री सुदीव्य कुमार, मुख्य सचिव अलका तिवारी समेत जिले के तमाम आला अधिकारियों ने पुष्प अर्पित कर वीर सपूतों को नमन किया। यह सिर्फ एक औपचारिक श्रद्धांजलि नहीं थी, बल्कि आदिवासी अस्मिता और संघर्ष की गूंज थी, जो आज भी समाज को जगाने का काम कर रही है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि सिद्धो-कान्हू का विद्रोह सिर्फ ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ नहीं था, बल्कि यह उस आवाज़ का प्रतीक था जो न्याय, अधिकार और आत्मसम्मान की मांग करती थी। हूल दिवस के ज़रिए युवाओं को ये संदेश दिया गया कि बदलाव संघर्ष से आता है और आज भी उनके पदचिन्हों पर चलने की जरूरत है – ताकि सामाजिक न्याय एक नारा नहीं, हकीकत बन सके।













