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“बाल अधिकारों की अलख जगाता कारवां पहुंचा गिरिडीह, अब गांव-गांव में बोलेगा बदलाव का नाटक”

गिरिडीह से आज एक प्रेरक पहल की शुरुआत हुई—नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी जी के नेतृत्व में “करुणामय बाल मित्र ग्राम कारवां” को समाहरणालय परिसर से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।

यह जागरूकता रथ अब जिले के तिसरी, देवरी और गांवा जैसे सुदूरवर्ती गांवों में एक महीने तक बाल अधिकारों और सामाजिक बुराइयों—जैसे बाल विवाह, बाल श्रम, नशा और घरेलू हिंसा—के खिलाफ आवाज़ बुलंद करेगा। नुक्कड़ नाटक, बाल चौपाल और जन संवाद के माध्यम से यह अभियान न केवल बच्चों को जागरूक बनाएगा, बल्कि पूरे समुदाय को उनके साथ खड़े होने के लिए प्रेरित करेगा। गिरिडीह के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और समाजसेवी इस मिशन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं।

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