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शिक्षकों की भारी कमी से झारखंड के कई जिलों में 10वीं के रिजल्ट में गिरावट, खासकर रांची और चाईबासा में स्थिति चिंताजनक

झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) के ताजा 10वीं बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट में कुल मिलाकर 1.31 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है, लेकिन इसके बावजूद रांची, गुमला, चाईबासा जैसे कई जिलों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। पिछले साल गुमला सातवें स्थान पर था, जो इस बार गिरकर 20वें पर आ गया है। रांची, जो पहले 15वें नंबर पर था, अब 21वें स्थान पर है। सरायकेला और लोहरदगा भी क्रमशः 22वें और 23वें स्थान पर हैं। चाईबासा की स्थिति सबसे खराब है, जो 24वें और अंतिम स्थान पर पहुंच चुका है। इन जिलों में शिक्षकों की भारी कमी और खराब आधारभूत संरचना रिजल्ट गिरने की मुख्य वजह बनी है।

दैनिक भास्कर की जांच में खुलासा हुआ है कि रांची में शिक्षकों के कुल स्वीकृत पदों की तुलना में 20 फीसदी पद खाली हैं। गुमला में यह कमी 37 फीसदी है, जबकि चाईबासा में तो 63 फीसदी शिक्षक पद खाली हैं। इस कारण स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति भी कम होती है और पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित होती है। कई शिक्षकों का कहना है कि स्कूलों में पढ़ाई की नियमित मॉनिटरिंग नहीं हो पाती, जिससे शिक्षण प्रक्रिया कमजोर हो रही है। रिजल्ट में गिरावट को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने इन जिलों के शिक्षा अधिकारियों से जवाब मांगा है और इस मामले की समीक्षा की जा रही है।

रांची के जिला शिक्षा अधिकारी विनय कुमार ने बताया कि जिले के रिजल्ट में गिरावट का एक बड़ा कारण पांच प्रमुख स्कूलों का सीबीएसई बोर्ड में चले जाना है। रांची में कुल 175 संबद्धता प्राप्त स्कूल हैं, जिन पर सीधे नियंत्रण नहीं रहता। इससे मॉनिटरिंग में दिक्कतें आती हैं और शिक्षण गुणवत्ता प्रभावित होती है। उन्होंने बताया कि सभी स्कूल प्राचार्यों को रिजल्ट की जानकारी देने के लिए पत्र भेजे गए हैं और रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। साथ ही, रिजल्ट में सुधार के लिए दिशा-निर्देश भी जारी किए जाएंगे।

झारखंड राज्य माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव रविंद्र प्रसाद सिंह ने शिक्षकों पर अनावश्यक गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ बढ़ने को भी रिजल्ट गिरने का बड़ा कारण बताया। उनका कहना है कि अधिकारी शिक्षकों की समस्याओं को समझने में असफल रहते हैं और वेतन लेने के लिए भी शिक्षकों को कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ता है। इससे शिक्षक स्कूल में कम समय दे पाते हैं, जिसका असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि जल्द से जल्द शिक्षकों की कमी दूर की जाए और उन्हें शिक्षण कार्य में पूरी स्वतंत्रता दी जाए, तभी रिजल्ट में सुधार संभव होगा।

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