भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को कमजोर शुरुआत की है, जहां बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 700 अंकों के करीब गिरावट के साथ 81,000 के स्तर से नीचे आ गया। वहीं, निफ्टी 24,600 के नीचे फिसल गया और 24,610 के आसपास कारोबार करता दिखा। बुधवार को अमेरिकी बाजारों में तेज गिरावट और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं का असर यहां भी देखने को मिला है। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी राजकोषीय घाटा, कोविड-19 मामलों में वृद्धि और तकनीकी ओवरबॉट जैसी चुनौतियां निवेशकों की चिंता बढ़ा रही हैं, जिसके चलते मंदी का दबाव बाजार पर फिर से छा गया है। ब्रेंट क्रूड में भी मामूली गिरावट दर्ज की गई है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था में अस्थिरता का संकेत है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ते आर्थिक दबाव और अमेरिकी बॉन्ड मार्केट में अनिश्चितताओं के कारण निवेशक सतर्क हो गए हैं। अमेरिका के राजकोषीय घाटे और ऋण संबंधी चिंताओं ने बाजार में बेचैनी बढ़ाई है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रणनीतिकार वीके विजयकुमार के मुताबिक, अमेरिकी बॉन्ड की कमजोर नीलामी और बढ़ती पैदावार से वैश्विक निवेशकों का भरोसा कम हो रहा है, जिससे उभरते बाजारों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। भारतीय शेयर बाजार में भी इसका सीधा असर देखा जा रहा है। हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को खरीदारी कर कुछ राहत दी, लेकिन गुरुवार को फिर से बिकवाली का दबाव बढ़ गया है। सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों जैसे टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में खासा गिरावट देखने को मिली।
एशियाई बाजारों में भी नरमी का माहौल रहा, जहां जापान का निक्केई 225, दक्षिण कोरिया का कोस्पी और हांगकांग का हैंगसेंग सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे, जबकि शंघाई का एसएसई कम्पोजिट सूचकांक कुछ मजबूती के साथ उभरा। भारत में बाजार में कमजोरी का असर रुपया पर भी पड़ा है, जो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 2 पैसे कमजोर होकर 85.61 के स्तर पर आ गया है। हालांकि कुछ शेयरों में जैसे अदाणी पोर्ट्स और इंडसइंड बैंक में खरीदारी का रुझान बना हुआ है। कुल मिलाकर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और घरेलू निवेशकों की सावधानी के बीच भारतीय शेयर बाजार फिलहाल दबाव में नजर आ रहा है, और आगे के कारोबारी सत्र में सतर्कता जरूरी है।












