जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में देश की सेवा करते हुए शहीद हुए बिहार के सपूत, हवलदार संतोष यादव का पार्थिव शरीर भागलपुर के नवगछिया के इस्माइलपुर प्रखंड स्थित उनके पैतृक गांव में पहुंचा। फूलों से सजे वाहन में तिरंगे में लिपटा उनका शव जब गांव में घुमाया गया, तो हजारों की संख्या में लोग शहीद की अंतिम झलक पाने और उन्हें श्रद्धांजलि देने उमड़ पड़े। पूरे गांव में ‘शहीद संतोष यादव जिंदाबाद’ और ‘हिंदुस्तान जिंदाबाद’ के नारों से गूंज उठी। यह दृश्य भावुक कर देने वाला था, जहां देशभक्ति और शोक दोनों की अनुभूति एक साथ हुई। गांव की गलियां, चौक-चौराहे शहीद के सम्मान में सजी थीं, और हर कोई उनके बलिदान को सलाम कर रहा था।
शहीद संतोष यादव की पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था, आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। परिजनों में गर्व भी था और अपार पीड़ा भी। शहीद के परिवार को सांत्वना देने के लिए भागलपुर के विधायक गोपाल मंडल भी पहुंचे और उन्होंने शोकाकुल परिवार को हिम्मत बंधाई। गांव की महिलाएं भी बड़ी संख्या में उनके घर आईं, शहीद की पत्नी के साथ खड़ी होकर ढांढस बंधाती रहीं। पूरे क्षेत्र में संतोष यादव के शौर्य और देशभक्ति की चर्चा थी। उनकी वीरता और बलिदान गांव वालों के दिलों में सदैव जीवित रहेगा।
आज शहीद संतोष यादव का अंतिम संस्कार पुलिस सम्मान के साथ किया जाएगा। यह अंतिम विदाई न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे बिहार और देश के लिए एक भावपूर्ण क्षण है। संतोष यादव ने देश की सीमा पर अपना सर्वोच्च बलिदान देकर हमें याद दिलाया है कि मातृभूमि की रक्षा के लिए उनके जैसे कई जवान हर पल तत्पर हैं।












