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ट्रैक्टर से रौंदी गई ईमानदारी: आरक्षक की हत्या पर हाईकोर्ट सख्त, चार आरोपी झारखंड से गिरफ्तार

बलरामपुर जिले के सनावल थाना क्षेत्र में रेत माफिया की हैवानियत का एक और खौफनाक चेहरा सामने आया है। 12 मई की रात पुलिस और वन विभाग की टीम रेत के अवैध खनन की सूचना पर कार्रवाई के लिए ग्राम लिबरा पहुंची थी। इसी दौरान अवैध रेत लेकर भाग रहे एक ट्रैक्टर को रोकने की कोशिश कर रहे आरक्षक शिव बचन सिंह को ट्रैक्टर से कुचल दिया गया। गंभीर रूप से घायल आरक्षक की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। यह घटना न सिर्फ सिस्टम की लापरवाही उजागर करती है, बल्कि रेत माफिया के बेखौफ नेटवर्क को भी सामने लाती है।
मामले में पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए झारखंड के गढ़वा जिले से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी हैं—आरीफूल हक, जमील अंसारी, शकील अंसारी और अकबर अंसारी, जो अवैध रेत परिवहन में शामिल थे। इनके कब्जे से दो ट्रैक्टर भी जब्त किए गए हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, वन अधिनियम और खान एवं खनिज अधिनियम की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। बाकी आरोपियों की तलाश अब भी जारी है। यह कार्रवाई बताती है कि अगर प्रशासन चाहे तो माफिया की जड़ें हिलाई जा सकती हैं।
इस जघन्य हत्याकांड को लेकर अब बिलासपुर हाईकोर्ट ने भी सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP), खनिज सचिव और वन विभाग को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। कोर्ट ने साफ कहा कि यह घटना दर्शाती है कि प्रदेश में अवैध खनन किस हद तक फैल चुका है और उसे रोकने के सरकारी दावे कितने खोखले हैं। हाईकोर्ट की फटकार के बाद पुलिस और वन विभाग ने रेत माफियाओं पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई स्थायी होगी या फिर एक और जान जाने के बाद सबकुछ शांत हो जाएगा?

इस बीच घटना पर राजनीति भी तेज हो गई है। मृतक आरक्षक का संबंध जिस क्षेत्र से था, वह प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम का गृहक्षेत्र भी है। मंत्री ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि मृत आरक्षक उनके लिए पारिवारिक सदस्य जैसा था। उन्होंने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से मुलाकात कर मामले की जानकारी दी है। साथ ही बलरामपुर कलेक्टर और एसपी को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से यह क्षेत्र रेत तस्करी का गढ़ बना हुआ है, जहां प्रशासनिक मिलीभगत और राजनीतिक संरक्षण के कारण माफिया बेलगाम हो गए हैं। अब देखना यह है कि क्या यह मामला रेत माफिया पर लगाम कसने की शुरुआत बनेगा या फिर एक और शहीद की कुर्बानी सिस्‍टम की फाइलों में दबकर रह जाएगी।

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