गिरिडीह की औद्योगिक पहचान बनाने वाले और जिले में दूसरा सबसे बड़ा टीएमटी फैक्ट्री लगाने वाले लाल स्टील ग्रुप के चेयरमैन गोवर्धन लाल का निधन रविवार को दुर्गापुर में हो गया। वे 85 वर्ष के थे और पिछले कई दिनों से एक निजी अस्पताल में इलाजरत थे। शनिवार देर शाम उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद हालत लगातार गंभीर होती चली गई। रविवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। गोवर्धन लाल अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं, जिसमें उनके तीन बेटे जयप्रकाश लाल, पूर्व विधायक मुन्ना लाल और विजय लाल के साथ-साथ पौत्र भी शामिल हैं।
स्वर्गीय गोवर्धन लाल गिरिडीह में औद्योगिक क्रांति के अग्रदूत माने जाते थे। उन्होंने लाल स्टील टीएमटी फैक्ट्री की नींव रखकर न सिर्फ जिले के आर्थिक विकास में योगदान दिया बल्कि युवाओं को रोजगार भी उपलब्ध कराया। उनके नेतृत्व में फैक्ट्री ने कई उतार-चढ़ावों का सामना किया, लेकिन उनके बड़े बेटे जयप्रकाश लाल और पूर्व विधायक मुन्ना लाल के सहयोग से लाल स्टील ने प्रगति की नई ऊंचाइयों को छुआ। गोवर्धन लाल की दूरदर्शिता और मेहनत के बल पर गिरिडीह का नाम पूरे राज्य में औद्योगिक पहचान बना।
उनके निधन की खबर जैसे ही गिरिडीह और आसपास के क्षेत्रों में फैली, शोक की लहर दौड़ गई। समाज के हर वर्ग और खासकर उद्योग जगत में उनके योगदान को याद करते हुए लोग भावुक हो उठे। कई राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों ने उनके निधन पर गहरा शोक प्रकट किया। मंत्री सुद्विया कुमार सोनू, पूर्व विधायक निर्भय शाहाबादी, उद्योगपति डॉक्टर गुणवंत सिंह मोंगिया, डॉक्टर अमरजीत सिंह सलूजा, हरमिंदर सिंह मोंगिया, सनी सिंह सलूजा, तरणजीत सिंह सलूजा, स्तविंदर सिंह सलूजा, जोरावार सिंह सलूजा, प्रमोद अग्रवाल, प्रदीप अग्रवाल, राजू बगेड़िया और अशोक जैन सहित कई लोगों ने उनके परिवार के प्रति संवेदना जताई।
गोवर्धन लाल न केवल एक सफल उद्योगपति थे बल्कि समाजसेवा में भी सक्रिय रहते थे। उन्होंने हमेशा स्थानीय विकास और जनकल्याण को प्राथमिकता दी। उनके द्वारा शुरू की गई फैक्ट्री आज हजारों परिवारों के जीवन को संवार रही है। उनके निधन से गिरिडीह को अपूरणीय क्षति हुई है। क्षेत्र की औद्योगिक तरक्की में उन्होंने जो बीज बोया, वह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा। उनका जाना गिरिडीह के लिए एक युग का अंत है, जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी।












