झारखंड के गिरिडीह जिले में एक ऐसा रहस्योद्घाटन हुआ है, जिसने न सिर्फ स्वास्थ्य विभाग को हिलाकर रख दिया है, बल्कि शासन और प्रशासन की संवेदनहीनता पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सोचिए, जिन दवाओं से किसी मां का बच्चा बच सकता था, जिन इंजेक्शनों से किसी बुजुर्ग की जिंदगी बढ़ सकती थी—वही दवाएं लावारिस हालत में सड़क किनारे फेंकी मिलती हैं। और चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से अधिकांश दवाएं एक्सपायरी भी नहीं थीं। यह कोई छोटी-मोटी चूक नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ी लापरवाही या फिर किसी गहरे खेल की ओर इशारा कर रही है। आखिर कौन है जो जनता की जिंदगी से खेल रहा है?
मामला गिरिडीह जिले के राजधनवार क्षेत्र का है। रविवार को धनवार-सरिया मार्ग पर बिरनी और धनवार प्रखंड की सीमा पर सड़क किनारे लाखों रुपए की जीवनरक्षक दवाइयां पड़ी मिलीं। इन दवाओं में वैक्सीन, इंजेक्शन, टैबलेट और कैप्सूल शामिल थे, और उनमें से अधिकांश दवाएं अब भी उपयोग लायक थीं। स्थानीय लोगों ने जब यह भयावह दृश्य देखा, तो तुरंत उपायुक्त और स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी। खबर मिलते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया, मानो कोई बड़ा राज़ खुल गया हो।
जैसे ही घटना की भनक लगी, श्रीरामडीह पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि अंसारी भाई और पंचायत समिति सदस्य भीमदेव यादव मौके पर पहुंचे और पूरे क्षेत्र का जायजा लिया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह कोई सामान्य बात नहीं है, बल्कि यह सिस्टम में गहराई तक फैली भ्रष्टाचार की जड़ का संकेत देता है। लोगों की जान बचाने के लिए खरीदी गई दवाएं, बिना कारण लावारिस फेंक दी गईं—यह न सिर्फ सरकारी पैसे की बर्बादी है, बल्कि गरीबों के हक का खुला अपमान भी है।
घटना की सूचना पर सीआई रामलखन मिस्त्री, परसन ओपी के पुलिसकर्मी और अस्पताल के कर्मचारी एंबुलेंस लेकर मौके पर पहुंचे। उन्होंने करीब दस बोरा से भी अधिक दवाओं को समेटकर वापस धनवार अस्पताल लाया। जब इस विषय पर चिकित्सा प्रभारी डॉ. इंदुशेखर से सवाल किया गया, तो उन्होंने साफ कहा कि यह दवाएं उनके ब्लॉक की नहीं हैं और पूरे मामले की जांच सीएस स्तर पर की जानी चाहिए। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब इतनी बड़ी मात्रा में दवाएं गायब हो सकती हैं, तो क्या बाकी योजनाओं में भी यही हो रहा है?












