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एमजीएम अस्पताल हादसा: जर्जर इमारत गिरी, दो की मौत, सीएम ने जताया शोक

जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में शनिवार रात बड़ा हादसा हो गया, जब बी ब्लॉक का एक हिस्सा अचानक गिर गया। इस दर्दनाक घटना में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य के घायल होने की आशंका है। घटनास्थल पर रेस्क्यू ऑपरेशन देर रात तक जारी रहा। हादसे के तुरंत बाद झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर दुख जताया और अधिकारियों को त्वरित राहत कार्य के निर्देश दिए। सीएम के निर्देश पर स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी और स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव अजय कुमार सिंह रात में ही अस्पताल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। मंत्री ने घटना पर गहरा शोक जताया और घायलों को हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यह हादसा उस समय हुआ जब मेडिसिन विभाग के दूसरे मंजिल का एक कॉरिडोर अचानक भरभराकर गिर गया। चार मरीज मलबे में दब गए, जिनमें से दो को सुरक्षित निकाला गया, लेकिन एक महिला की हालत गंभीर बनी हुई है। बताया जा रहा है कि बी ब्लॉक की यह इमारत पिछले कई वर्षों से जर्जर हालत में थी और कई बार इसकी शिकायत भी की गई थी, मगर मरम्मत का कार्य नहीं किया गया। यह हादसा न सिर्फ अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि झारखंड की स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत को भी सामने लाता है।

घटनास्थल पर पहुंचे स्थानीय विधायक सरयू राय और पूर्णिमा साहू ने प्रशासन और राज्य सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि यह हादसा लापरवाही का नतीजा है। अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. नकुल चौधरी ने भी स्वीकार किया कि गिरा हुआ हिस्सा करीब 40 साल पुराना था। एनडीआरएफ की टीम मलबे में फंसे अन्य लोगों की तलाश में जुटी रही। सवाल यह भी उठ रहा है कि मनगो डिमना रोड पर बने 500 बेड के नए अस्पताल को अभी तक शुरू क्यों नहीं किया गया, जबकि उसका उद्घाटन काफी पहले हो चुका है।

इस हादसे ने झारखंड की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर स्थिति को फिर एक बार सामने ला दिया है। एक ओर जहां मरीजों को पुरानी और जर्जर इमारतों में भर्ती किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर आधुनिक सुविधाओं से लैस नए अस्पताल पानी और तकनीकी समस्याओं की वजह से बंद पड़े हैं। यह घटना भविष्य में किसी बड़ी त्रासदी का संकेत भी हो सकती है, अगर सरकार और प्रशासन ने समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए। अब देखना यह होगा कि इस हादसे के बाद सिर्फ बयानबाजी होती है या फिर स्वास्थ्य व्यवस्था में कोई ठोस सुधार देखने को मिलेगा।

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