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UPSC Result: झारखंड के होनहारों ने सिविल सर्विसेज की परीक्षा में मारी बाजी, लहराया सफलता का परचम!

जब भी हम सफलता की कहानी सुनते हैं, तो एक उम्मीद और एक प्रेरणा मिलती है। खासकर जब ये सफलता अपने राज्य के होनहार युवाओं द्वारा हासिल की जाती है। यह कहानी उन युवाओं की है जिन्होंने झारखंड के नाम को रोशन किया है। आज हम बात कर रहे हैं UPSC 2023 के परिणाम की, जिसमें झारखंड के छात्रों ने न सिर्फ अपनी मेहनत का लोहा मनवाया, बल्कि साबित किया कि अगर लगन हो, तो कोई भी मुश्किल पार पाई जा सकती है। इस बार UPSC सिविल सर्विसेज की परीक्षा में झारखंड की बेटियों ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है, और इनकी सफलता ने पूरे राज्य में एक नई उम्मीद का जन्म दिया है।

सिविल सर्विसेज परीक्षा 2023 में टेंडर हार्ट की पूर्व छात्रा हर्षिता ने 410वां रैंक हासिल कर एक नया इतिहास रच दिया। हर्षिता, जो बचपन से ही मेधावी रही हैं, ने अपनी सफलता का श्रेय अपने स्कूल और वहां के शिक्षकों को दिया है। उनका मानना है कि टेंडर हार्ट स्कूल ने उन्हें सही दिशा और मार्गदर्शन दिया, जिसके कारण वह इस मुकाम तक पहुंच पाईं। स्कूल की संस्थापिका गार्गी मंजू और विद्यालय परिवार के समर्थन को वह अपने सफलता का सबसे अहम हिस्सा मानती हैं। हर्षिता ने 2017 में 12वीं की परीक्षा पास की थी और अब वह UPSC की मुख्य परीक्षा में सफलता का परचम लहरा रही हैं।

दूसरी ओर, जमशेदपुर की स्वाति शर्मा ने अखिल भारतीय स्तर पर 17वां रैंक प्राप्त कर झारखंड में टॉप किया है। स्वाति के पिता पूर्व थल सैनिक संजय शर्मा और माता आशा देवी की मेहनत और संघर्ष का फल अब रंग लाया है। स्वाति का कहना है कि यह सफलता उनकी मेहनत के साथ-साथ उनके परिवार और स्कूल के समर्थन का परिणाम है। उनका लक्ष्य झारखंड के विकास में नई सोच और दिशा देने का है। स्वाति का मानना है कि युवाओं में राष्ट्र और राज्य में बदलाव लाने की क्षमता है, और वह अपनी सफलता का उपयोग समाज की बेहतरी के लिए करेंगी।

अंत में, हम बात करते हैं डोरंडा की प्रेरणा सिंह की, जिन्होंने UPSC परीक्षा में 271वां स्थान हासिल किया है। यह सफलता उन्होंने चौथे प्रयास में प्राप्त की है, और उनका मानना है कि अगर कठिनाईयों से उबरने की मजबूत इच्छा हो, तो सफलता अवश्य मिलती है। प्रेरणा की माँ ममता सिंह, जो पशुपालन विभाग में कार्यरत हैं, ने बताया कि उनकी बेटी ने इस सफलता को प्राप्त करने के लिए निरंतर मेहनत की और कभी हार नहीं मानी। प्रेरणा की सफलता न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे राज्य के लिए गर्व की बात है।

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