गिरिडीह नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है, जिन्हें अंधकार और बुरी शक्तियों का नाश करने वाली देवी माना जाता है। मां कालरात्रि का स्वरूप अत्यंत भयावह है, लेकिन वे अपने भक्तों पर सदा दयालु रहती हैं। मान्यता है कि उनकी आराधना करने से भय और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है। इस दिन भक्त विशेष रूप से रात की रानी का फूल माता को अर्पित करते हैं और गुड़ या गुड़ से बने पकवान, जैसे मालपुआ, का भोग लगाते हैं। ऐसा करने से माता प्रसन्न होकर अपने भक्तों को साहस और शक्ति का आशीर्वाद देती हैं।

मां कालरात्रि की पूजा विधि में प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद, चौकी पर उनकी प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाता है। इसके बाद काली चुन्नी चढ़ाकर, रोली, अक्षत, दीप और धूप से पूजा की जाती है। भक्त दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ कर मां से आशीर्वाद मांगते हैं। माना जाता है कि मां कालरात्रि की कृपा से व्यक्ति के सभी शत्रुओं का नाश होता है और जीवन में सकारात्मकता एवं विजय का संचार होता है।













