गिरिडीह में इस वर्ष चैत्र नवरात्रि में एक विशेष संयोग बना है, जहां आज, 2 अप्रैल 2025 को, चतुर्थी और पंचमी तिथि एक साथ पड़ रही हैं। इस दुर्लभ संयोग के कारण भक्तों को एक ही दिन में मां कुष्मांडा और मां स्कंदमाता की पूजा करने का अवसर प्राप्त हो रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस शुभ योग में विधिपूर्वक पूजा करने से भक्तों को विशेष कृपा और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।मां कुष्मांडा को ब्रह्मांड की उत्पत्ति करने वाली देवी माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां कुष्मांडा के उदर से ही समस्त सृष्टि का जन्म हुआ था। इन्हें अष्टभुजा धारी देवी के रूप में पूजा जाता है, जो अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। भक्तगण षोडशोपचार विधि से उनकी आराधना कर कुंद पुष्प, मालपुए और लक्षार्चन का विशेष भोग अर्पित कर रहे हैं।

इसी दिन मां स्कंदमाता की भी पूजा की जा रही है, जो भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इनकी उपासना से संतान सुख की प्राप्ति होती है और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है। भक्तगण मां स्कंदमाता को केले और कुमुद पुष्प अर्पित कर विशेष आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

आज के इस शुभ संयोग में भक्तजन मंदिरों में विशेष हवन, मंत्र जाप और दुर्गा सप्तशती पाठ कर रहे हैं। धार्मिक पंडितों के अनुसार, यह संयोग अत्यंत लाभकारी है, जिससे साधकों को दोगुनी कृपा प्राप्त होगी और उनके जीवन में सुख-समृद्धि आएगी।













