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भगवा झंडा छोड़ हरे झंडे के साथ चले जमुआ विधायक केदार हाजरा

भाजपा छोड़ झामुमो का थामा दामन, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व गांड़ेय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन के समक्ष ली पार्टी की सदस्यता

गिरिडीह. झारखण्ड में विद्यानसभा चुनाव के घोषणा होने के बाद से ही विभिन्न राजनीतिक दलों में उठा – पटक शुरू हो गया है. टिकट कटने के बाद नेताओं के इधर – उधर जाने का सिलसिला लगातार जारी है. इसी कड़ी में आज गिरिडीह जिले में भाजपा को एक बड़ा झटका लगा है. यंहा जमुआ विद्यानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रहे केदार हाजरा ने आज पार्टी से टिकट कटने के बाद भाजपा को छोड़ झामुमो का दामन थाम लिया है. केदार हाजरा ने आज रांची में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व गांडेय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन के समक्ष पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है. केदार हाजरा के झामुमो में शामिल होने के बाद सोशल मीडिया पर तरह – तरह के पोस्ट आने शुरू हो गए हैं. आपको बता दें की केदार हाजरा जमुआ विद्यानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रह चुके हैं, लेकिन हाल के दिनों में केदार हाजरा के खिलाफ इनके विद्यानसभा क्षेत्र में लगातार लोगों के द्वारा विरोध किया जा रहा था, लेकिन इन सब के बीच पार्टी ने इन्हे प्रमोट किया, इतना ही नहीं केदार हाजरा के विद्यानसभा क्षेत्र के झारखण्डधाम में कुछ ही दिनों पूर्व भाजपा ने परिवर्तन यात्रा की शुरुआत की थी जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत असम के मुख्यमंत्री हेमंता विशवा शरमा, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, अन्नपूर्णा देवी, पूर्व मुख्यमंत्री सह प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी समेत कई बड़े नेताओं ने शिरकत की थी. इस कार्यक्रम के बाद ऐसा तय माना जा रहा था की जमुआ से इस बार फिर भाजपा केदार हाजरा को अपना उम्मीदवार बनायेगी, लेकिन इन सब के बीच 2019 के विद्यानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी से चुनावी मैदान में उतरी मंजू कुमारी ने कांग्रेस पार्टी छोड़ कऱ भाजपा का दामन थाम लिया, फिर क्या केदार हाजरा की तो नींद ही उड़ गयी और उन्होंने यह तय माना की अब उनका टिकट लगभग कट गया है. इसी के बाद से लगातार केदार हाजरा कांग्रेस व झामुमो के बड़े नेताओं से सम्पर्क स्थापित करने लगे और दिल्ली जाकर पूरी रणनीति तैयार कऱ अंतत : झामुमो में जाने का फैसला ले लिया. अब देखना दिलचस्प होगा की जमुआ विद्यानसभा क्षेत्र से इंडिया गठबंधन क्या केदार हाजरा को अपना उम्मीदवार बनाती है या फिर इनकी भी हालत पहले के नेताओं की तरह हो जाती है, क्योंकि इस सीट से कांग्रेस व भाकपा माले भी अपनी दमदार दावेदारी पेश कऱ रही है.

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